नई दिल्ली - दुनिया भर में एक बार फिर महंगाई का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है और ब्रेंट क्रूड करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह स्तर लगभग चार साल का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी सैन्य टकराव है। इस संकट के कारण वैश्विक तेल सप्लाई पर भारी असर पड़ा है, जिससे बाजार में घबराहट का माहौल है।
आम लोगों की जेब पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा और दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में आ सकती हैं।तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक दबाव बढ़ा दिया है और तेल टैंकरों को रोकने की कार्रवाई भी तेज कर दी है।
ईरान-अमेरिका की लगाई तेल सप्लाई को कर रही प्रभावित
वहीं ईरान ने भी साफ संकेत दिए हैं कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। दोनों देशों के बीच यह टकराव अब सीधे तेल सप्लाई को प्रभावित कर रहा है। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद हो चुका है। यह रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा संभालता है। इसके बंद होने से कच्चे तेल, गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही लगभग रुक गई है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक बन सकता है।