मंगलवार को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने एक लेख लिख कर पीएम मोदी और केन्द्र सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को खत्म करने सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग करने, न्यायपालिका को कमजोर करने और भारतीय मीडिया से समझौता करने के लिए उनकी आलोचना की है।
सरकार ने जरुरी मुद्दों को किया नजरअंदाज
एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि, पीएम मोदी अपनी गलती छुपाने के लिए पिछली सरकार और पुराने नेताओं को दोषी ठहराते है।
सोनिया गांधी ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करती है। उन्होंने कहा कि, 95 प्रतिशत से अधिक राजनीतिक मामले केवल विपक्षी दलों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। वहीं, जो लोग भाजपा में शामिल हो गए उन पर लगे सभी आरोप गायब हो गए है।
सरकार ने संसद नहीं चलने दी: Sonia Gandhi
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी ने संसद नहीं चलने दी। उन्होंने कहा कि “सरकार ने पिछले महीनों में लोकतंत्र के तीनों स्तंभों- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को ध्वस्त कर दिया है।” साथ ही उन्होंने कहा कि अडानी के मुद्दे पर सरकार ने संसद में चर्चा नहीं होने दी, यही डर के कारण सरकार ने राहुल गांधी की सदस्यता भी खत्म कर दी।
उन्होंने लिखा कि, “पिछले सत्र में विपक्ष को बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक विभाजन जैसे गंभीर मुद्दों को उठाने से रोकने और साल के बजट और अडानी घोटाले पर विपक्ष को चर्चा करने से रोकने के लिए सरकार की रणनीति देखी। मजबूत विपक्ष के लिए मोदी सरकार ने अभूतपूर्व उपायों का सहारा लिया। भाषणों को मिटाया गया, चर्चा रोकी गई और संसद सदस्यों पर हमला किया गया और आखिर में कांग्रेस के एक सदस्य को अयोग्य घोषित कर दिया गया। नतीज यह हुआ कि जनता के पैसे का 45 लाख करोड़ रुपये का बजट बिना किसी बहस के पास हो गया। जब वित्त विधेयक लोकसभा के माध्यम से पेश किया गया, प्रधान मंत्री व्यापक मीडिया कवरेज के साथ अपने निर्वाचन क्षेत्र में परियोजनाओं के उद्घाटन में व्यस्त थे।”
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