कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा लगातार बढ़ रहा है (Karnataka Elections 2023)। तमाम राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच कांग्रेस ने चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले अपना घोषणापत्र जारी किया है (Congress Manifesto)। जिसमें कांग्रेस ने बजरंग दल की तुलना पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से की है। साथ ही पार्टी ने प्रदेश में सत्ता पर काबिज होने के बाद इन संगठनों पर बैन लगाने की बात भी कही है। कांग्रेस की इस घोषणा के बाद से ही सत्ताधारी पक्ष लगातार हमलावर हो रहा है। इसी कड़ी में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि कांग्रेस मुसलमानों को खुश करने के लिए बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने को कह रही है।
सरमा का कांग्रेस पर निशाना
कांग्रेस के घोषणापत्र पर असम के सीएम हिंमत बिस्वा सरमा ने निशाना साधा है। सरमा ने कहा कि, "पीएफआई पर पहले से ही प्रतिबंध है। सिद्धारमैया सरकार ने पीएफआई के मामले वापस लिए इसलिए वे कह रहे हैं कि मुसलमानों को खुश करने के लिए वे बजरंग दल पर प्रतिबंध लगा देंगे। कांग्रेस कह रही है कि पीएफआई यह नहीं कह सकता कि हम बदला लेंगे। कांग्रेस का घोषणापत्र पीएफआई और कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों के घोषणापत्र जैसा दिखता है।"
असम के सीएम ने आगे कहा कि अगर आज जिन्ना होते तो भी ऐसा घोषणापत्र जारी नहीं करते। उन्होंने कहा कि, "गृह मंत्री ने PFI को बैन किया तो कांग्रेस बोल रही है कि वे बजरंग दल को बैन करेंगे, मुस्लिम आरक्षण को फिर से शुरु करेंगे। कांग्रेस ने जो घोषणापत्र जारी किया है वह पूरा मुसलमान घोषणा पत्र है। जिन्ना भी ज़िंदा होते तो ऐसा घोषणा पत्र जारी नहीं करते।"

क्या है कांग्रेस का वादा? (Congress Manifesto)
आपको बता दें कि कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया है कि सत्ता में आने के बाद वे बजरंग दल और पीएफआई जैसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा देंगे। कांग्रेस ने कहा कि वह ऐसे संगठनों पर बैन लगा देगी जो दुश्मनी या नफरत को बढ़ावा देते हैं। कहा कि अगर पार्टी राज्य में सत्ता में आती है, तो नफरत फैलाने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाने सहित कानून के अनुसार निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।
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