दक्षिण दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को एक 5 मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई और 6 अन्य घायल हो गए। करीब 50 साल पुरानी इस इमारत में 'होस्टल डेज' नाम से पीजी (PG) चलाया जा रहा था, जिसमें लगभग 75 छात्र रहते थे। बुधवार को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए पीजी ऑपरेटर सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के साथ ही मामले में अब तक कुल 5 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है।
मामले में अब तक 5 गिरफ्तारियां, एक पार्टनर फरार
पुलिस जांच के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 81 वर्षीय भवन मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता (जिनके नाम पर संपत्ति दर्ज है), उनका बेटा महेश गुप्ता (जो पीजी के प्रबंधन का काम देखता था), लेबर ठेकेदार सनोज और पीजी ऑपरेटर सुधांशु शामिल हैं। रिमांड के दौरान पूछताछ में आरोपी महेश गुप्ता ने खुलासा किया कि उसने अगस्त 2025 में यह इमारत शुभम त्यागी और सुधांशु को 1.05 लाख रुपये प्रति माह के किराए पर लीज पर दी थी। दोनों पार्टनर मिलकर इस जगह पर 'होस्टल डेज' नाम से पीजी चला रहे थे। फिलहाल शुभम त्यागी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।
आस-पास के कमजोर ढांचों को गिराने का फैसला
पांच मंजिला इमारत के अचानक जमींदोज हो जाने के बाद नागरिक अधिकारियों ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा की जांच की। जांच के दौरान ढही हुई इमारत के ठीक बगल वाली इमारत भी बेहद कमजोर और असुरक्षित पाई गई। इसके बाद नगर निगम (MCD) ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से उस निकटवर्ती ढांचे को चरणबद्ध और नियंत्रित तरीके से ढहाने (Demolition) का निर्णय लिया है।
अवैध निर्माणों और PG पर मुख्यमंत्री का कड़ा एक्शन
सत्या निकेतन हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूरे शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने एमसीडी को निर्देश दिया है कि वह दिल्ली के विभिन्न इलाकों में अवैध ढांचों के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चलाए और इस दौरान वरिष्ठ नगर निगम अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पूरी दिल्ली में चल रहे पीजी और हॉस्टलों का सघन निरीक्षण करने के आदेश दिए गए हैं।
इमारत के पुराने रिकॉर्ड खंगालने के निर्देश
शासकीय स्तर पर इस बात की भी गहन जांच शुरू कर दी गई है कि यह 50 साल पुरानी इमारत बिना सुरक्षा मानकों के इतने मंजिलों तक कैसे खड़ी रही। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भवन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच करने का निर्देश दिया है। इसके तहत यह पता लगाया जा रहा है कि अवैध निर्माण किस अवधि में हुआ और उस दौरान किस प्राधिकारी या अधिकारी के पास उस क्षेत्र का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) था, ताकि जिम्मेदार लोगों पर नकेल कसी जा सके।