कोलकाता: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के छात्र आंदोलनों और युवाओं से संवाद को लेकर दिए गए बयान का समर्थन करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने कहा कि किसी भी सामाजिक या छात्र आंदोलन का समाधान बातचीत से ही निकल सकता है। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं को सुनना व उनका समाधान निकालना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।
युवाओं को गुमराह करने का लगाया आरोप
पत्रकारों से बातचीत में दिलीप घोष ने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया और विदेशी ताकतों के जरिए युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार कई छात्र अनजाने में ऐसे तत्वों के प्रभाव में आ जाते हैं, इसलिए उन्हें सही दिशा दिखाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत समाज के मार्गदर्शक हैं और उनका संदेश यही है कि युवाओं से संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि बातचीत के जरिए छात्र आंदोलनों का सकारात्मक हल निकलेगा।
झारखंड छात्र आंदोलन पर विपक्ष पर हमला
झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन और पेपर लीक के मुद्दे पर दिलीप घोष ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए आंदोलन करता है, जबकि गैर-भाजपा शासित राज्यों में छात्रों की समस्याओं पर चुप्पी साध लेता है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाए हैं, लेकिन कई राज्य सरकारें उन कानूनों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं कर रही हैं। उन्होंने झारखंड सरकार पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग भी की।
परिसीमन पर विपक्ष को घेरा
परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर दिलीप घोष ने कहा कि जनसंख्या के आधार पर उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो राजनीतिक दल आज परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वही अपने-अपने राज्यों में समय-समय पर वार्डों और प्रशासनिक सीमाओं का पुनर्गठन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना के बाद परिसीमन की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेगी तथा प्रत्येक क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। उनके अनुसार नए संसद भवन का निर्माण भी भविष्य में बढ़ने वाली लोकसभा सीटों को ध्यान में रखकर किया गया है।