तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य (Swami Rambhadracharya) ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ( Swami Rambhadracharya) कहा कि, पंडित नेहरू ने अपनी महत्वाकांक्षा में देश का विभाजन कर दिया था। धर्म के आधार पर देश का विभाजन करा दिया था। फिर भी हमने समरसता बरती। भारत में रहना है तो रघुवीर के होकर रहो।
भारत में रहना है तो वंदेमातरम कहना होगा
तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि, बाबर के नहीं इस विषय पर हम समरसता बरतने का ढोंग नहीं कर सकते। भारत में रहना है तो वंदेमातरम कहना होगा। भारत माता को भारत माता बोलो, गंगा, जमुना नर्मदा को उस भाव से देखना होगा। उन्होंने कहा कि, सरकार हमसे है, हम सरकार से नहीं। हमारा स्वर एक हो जाए तो हम सरकार को नचा सकते है, सरकार हमे नहीं नचा सकती।
मोदी जी ने वीआईपी कल्चर तो खत्म कर दिया
स्वामी रामभद्राचार्य ने आगे जान एल हनी की लाइन को कोड किया किया और ऑफ द पीपल, बाय द पीपल, फॉर द पीपल। राम राज में कोई वीआईपी नहीं था, हर इंसान समान था। मोदी जी ने वीआईपी कल्चर तो खत्म कर दिया लेकिन लोगों के अंदर से वीआईपी का भूत निकला नहीं। इस वीआईपी भूत को धीरेन्द्र शास्त्री भी खत्म नहीं कर पाए। जब तक भारत से वीआईपी कल्चर नहीं जाएगा तब तक भारत समर्थ भारत नहीं बन सकता।
जाति के आधार पर आरक्षण बंद हो
उन्होंने कहा कि, आज भी जनप्रतिनिधियों से मिलने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। जहां जानवरों को न्याय मिले हमें ऐसा भारत चाहिए। आज इंसानों को न्याय मिलने में 40, 40 साल लग जाते हैं। वहीं स्वामी रामभद्राचार्य ने आरक्षण को लेकर कहा कि, जाति के आधार पर आरक्षण बंद हो जाए तो 140 करोड़ लोगों में अपने आप समरसता आ जाएगी।
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