नई दिल्ली. चक्रवात अर्णब बुधवार सुबह भारत के पूर्वी तट से टकराया। बहुत भीषण चक्रवाती तूफान अब कमजोर पड़कर भीषण चक्रवाती तूफान में बदल गया है। इसने कई पेड़ और बिजली के खंभे उखाड़ दिए जिससे कई इलाकों में बिजली गुल हो गई। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तूफान से पहले एक लाख अस्सी हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार लैंडफॉल प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और मौसम प्रणाली अब पूरी तरह जमीन पर है। तूफान ने तटीय क्षेत्रों में काफी नुकसान पहुंचाया।
चक्रवात का गठन और तेजी से तीव्र होना
चक्रवात अर्णब 2026 में उत्तर हिंद महासागर बेसिन यानी बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बना पहला चक्रवात है। यह 23 अक्टूबर को दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव प्रणाली के रूप में शुरू हुआ। 26 अक्टूबर तक यह चक्रवात अर्णब में बदल गया। इसके बाद यह तेजी से भीषण चक्रवात और फिर बहुत भीषण श्रेणी में पहुंच गया। इस श्रेणी में हवा की गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक होती है। तूफान की जमीन की ओर गति मूल पूर्वानुमान से तेज रही। मौसम विभाग ने मंगलवार देर रात लैंडफॉल का समय आगे बढ़ा दिया।
लैंडफॉल के समय की तीव्रता
अर्णब का लैंडफॉल बुधवार सुबह एक बजे के आसपास शुरू हुआ। यह बापतला और विशाखापट्टनम के बीच तट को पार किया। लैंडफॉल के समय हवा की गति बहुत भीषण चक्रवात के बराबर 125-135 किलोमीटर प्रति घंटे थी जो झोंकों में 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। चक्रवात सबसे ज्यादा नुकसान लैंडफॉल के समय पहुंचाते हैं। तूफान का केंद्र जब समुद्र से जमीन पर आता है तो विनाशकारी प्रभाव पैदा होता है। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में इसका असर साफ देखा गया।
एल नीनो की भूमिका
एल नीनो यानी प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य गर्म होने की घटना ने चक्रवात अर्णब की तीव्रता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एल नीनो के प्रभाव से बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का तापमान और वायुमंडलीय स्थितियां चक्रवात के अनुकूल हो गईं। इससे तूफान को तेजी से ऊर्जा मिली और वह कम समय में बहुत भीषण श्रेणी में पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार एल नीनो वर्ष में बंगाल की खाड़ी के चक्रवात अक्सर ज्यादा तीव्र और विनाशकारी हो सकते हैं। अर्णब के मामले में भी यही देखने को मिला।
तूफान की गति और पूर्वानुमान
चक्रवात अर्णब की जमीन की ओर गति मूल पूर्वानुमान से तेज रही। मौसम विभाग को लैंडफॉल का समय आगे बढ़ाना पड़ा। यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में तेजी से बढ़ा और फिर तट की ओर मुड़ा। समुद्री स्थितियों और ऊपरी वायुमंडलीय पैटर्न ने इसकी गति को प्रभावित किया। एल नीनो के कारण हवा के पैटर्न में बदलाव ने भी तूफान को अतिरिक्त ताकत दी। पूर्वानुमान में इन कारकों को शामिल कर अपडेट जारी किए जाते रहे। तटीय राज्यों ने समय रहते अलर्ट जारी कर नुकसान कम करने की कोशिश की।
अब आगे की स्थिति और राहत कार्य
लैंडफॉल के बाद चक्रवात कमजोर पड़ रहा है लेकिन भारी बारिश और तेज हवाओं का असर कुछ समय तक बना रह सकता है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। बिजली बहाली, सड़कें साफ करने और प्रभावित लोगों की सहायता पर जोर दिया जा रहा है। मौसम विभाग लगातार निगरानी रखे हुए है। एल नीनो के जारी रहने से आने वाले महीनों में भी मौसम संबंधी चुनौतियां बनी रह सकती हैं। तटीय इलाकों में सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी गई है।