gay law - समलेंगिक कानून को लेकर देश भर में क्रियाएं और प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। कुछ लोग इसके पक्ष में हैं तो कई लोग विरोध में आवाज बुलंद कर रहे हैं।( gay law ) एक बार फिर से जबलपुर में डॉक्टर्स ने इसके विरोध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रपति से मांग की है कि समलेंगिंक कानून को रद्द किया जाए।
देश के कई क्षेत्रों में समलेंगिक कानून का विरोध हो चुका है
डॉक्टर्स के इस विरोध में कई बुद्धिजीवियों ने भी साथ दिया है। इससे पहले भी देश कई क्षेत्रों में समलेंगिक कानून का विरोध हो चुका है। अब सवाल यह उठता है कि वास्तव में यह कानून कितना जायज है और कितना नाजायज।
भारतीय संस्कृति के विपरीत
इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि समलेंगिक व्यवस्था को भारतीय संस्कृति इजाजत नहीं देती है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप खंडेलवाल कहते हैं कि कुछ लोग पाश्चात्य संस्कृति के गुलाम हो गए हैं। इसके अधीन रहकर यह हमारे देश की भव्य संस्कृति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। आज भी हमारा देश विश्वगुरू है। विदेश के लोग हमारी संस्कृति को अपना रहे हैं। विदेशों से आकर लोग भगवान राम और भगवान कृष्ण के आदर्श को मान कर उस पर चलने लगे हैं। और हमारे ही देश के कुछ युवा संस्कृति के विपरीत होकर समलेंगिकता को अपना रहे हैं। यह पूरी तरह से गलत है।
एक तरह का मानसिक रोग
वहीं आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय कहते हैं कि समलेंगिकता एक तरह का मानसिक रोग है। एक पुरूष की दूसरे पुरूष से बहुत अच्छी मित्रता हो सकती है। एक महिला की दूसरी महिला के साथ बहुत अच्छा मेलमिलाप हो सकता है लेकिन संबंध बनाकर साथ जीवन बिताने का निर्णय लेना कहीं से भी उचित नहीं है। हर बच्चे के माता-पिता का यह अरमान होता है कि उसके बच्चे बड़े होकर अपना जीवन बनाएं और शादी विवाह कर परिवार का वंश आगे बढ़ाएं लेकिन यह समलेंगिकता निश्चित रूप से एक बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है। जिसके भविष्य में बड़े दुखद परिणाम सामने आएंगे।
Written By - DILEEP PEL
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