नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट (IIPM) और उसके डीन अरिंदम चौधरी से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) को मामले में संज्ञान लेकर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वित्तीय अनियमितताओं और जनहित से जुड़े इस मामले की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी की जानी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला IIPM, जिसे अब सेंटर फॉर वोकेशनल एंड एंटरप्रेन्योरशिप स्टडीज के नाम से जाना जाता है, और उससे जुड़ी कंपनियों पर लगे वित्तीय अनियमितताओं तथा छात्रों को कथित रूप से गुमराह करने के आरोपों से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ब्रीजेश निरुला ने आरोप लगाया कि संस्थान ने फर्जी डिग्री और भ्रामक विज्ञापनों के जरिए हजारों छात्रों को भ्रमित किया तथा बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां कीं।
कोर्ट में सामने आए गंभीर खुलासे
दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल अनुपालन हलफनामे (Compliance Affidavit) और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) की रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार IIPM और अरिंदम चौधरी पर बिना UGC मान्यता के MBA और BBA जैसी डिग्रियां देने का दावा कर छात्रों को गुमराह करने के आरोप हैं।
वित्तीय रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी का दावा
जांच रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2011-12 में कंपनी के खातों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किए जाने के आरोप हैं। राजस्व को लगभग 320 करोड़ रुपये और खर्च को 43 करोड़ रुपये अधिक दिखाया गया, जिससे कंपनी के शुद्ध घाटे को करीब 86 करोड़ रुपये कम दर्शाने का आरोप लगाया गया है।
शेल कंपनियों और डमी डायरेक्टर का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अरिंदम चौधरी और उनकी पत्नी राजिता चौधरी ने कंपनियों का वास्तविक नियंत्रण अपने पास रखते हुए कई 'डमी डायरेक्टर' नियुक्त किए, ताकि कानूनी जवाबदेही से बचा जा सके। साथ ही वर्ष 2006 से 2012 के बीच अलग-अलग कंपनियों के नाम कई बार बदलकर जांच और कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश किए जाने का भी आरोप है।
MCA ने शुरू की जांच प्रक्रिया
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) ने अदालत को बताया कि उसने कंपनी अधिनियम की धारा 210 और 212 के तहत विस्तृत जांच की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी थी। इसके बाद कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने मामले में संज्ञान लेते हुए जांच शुरू करने के आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े वित्तीय मामलों की जांच में समय लग सकता है, लेकिन इसे अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
SPP नितिन अग्निहोत्री ने रखा सरकार का पक्ष
इस महत्वपूर्ण मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) नितिन अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी की। उनके साथ रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) दिल्ली-II के अधिकारी एवं अन्य विधि अधिकारियों ने भी अदालत में सरकार का पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि जांच प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
पहले भी विवादों में रहे हैं अरिंदम चौधरी
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि अरिंदम चौधरी पहले सेवा कर चोरी के मामले में न्यायिक हिरासत में रह चुके हैं। उनके और उनकी कंपनियों के खिलाफ अब तक 200 से अधिक मामले तथा 12 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी गई।
कोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि यदि जांच की रफ्तार संतोषजनक नहीं रहती है, तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। अदालत ने जांच एजेंसियों को निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
यह फैसला इस बात का संकेत है कि IIPM मामले में जांच अब औपचारिक रूप से आगे बढ़ चुकी है। विशेष रूप से SPP नितिन अग्निहोत्री द्वारा अदालत में केंद्र सरकार का पक्ष मजबूती से रखने और जांच की प्रगति को स्पष्ट करने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार की कार्रवाई को पर्याप्त मानते हुए अवमानना याचिका का निपटारा कर दिया।