नई दिल्ली. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसूनी प्रणाली इस समय पूरी तरह सक्रिय बनी हुई है, जिसके कारण उत्तर भारत, मध्य भारत, पश्चिमी भारत और पूर्वोत्तर के अनेक हिस्सों में व्यापक वर्षा होने की संभावना है। अगले पांच दिनों के दौरान उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र तथा अन्य कई राज्यों में हल्की से लेकर अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और अनुकूल मानसूनी हवाओं के कारण वर्षा का यह दौर कई स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न कर सकता है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और नागरिकों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
मध्य प्रदेश में जलभराव से बिगड़े हालात, राजधानी भोपाल सबसे अधिक प्रभावित
मध्य प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राजधानी भोपाल सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है, जहां अनेक कॉलोनियों में पानी घरों तक पहुंच गया और कई स्थानों पर जलभराव की गहराई लगभग पांच फुट तक दर्ज की गई। हजारों परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। नदियों और बांधों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा है, जबकि मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए आगामी दिनों में भी भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की है।
उत्तर प्रदेश में उफान पर नदियां, कई गांव बाढ़ की चपेट में
उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा का असर उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। गंगा, यमुना सहित अनेक नदियां खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रही हैं। फर्रुखाबाद और बिजनौर जैसे क्षेत्रों में नदी का पानी राष्ट्रीय राजमार्गों तक पहुंच गया है, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। कई गांवों का संपर्क टूट गया है और नदी कटाव के कारण अनेक मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तत्काल भारी वर्षा जारी रह सकती है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में सप्ताह के मध्य और अंतिम दिनों में वर्षा की तीव्रता बढ़ने की संभावना है। गरज-चमक और आकाशीय बिजली को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
राजस्थान में ऑरेंज और येलो अलर्ट, हाड़ौती क्षेत्र में मूसलाधार वर्षा
राजस्थान के पूर्वी हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग ने छह जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट तथा सत्रह जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। हाड़ौती क्षेत्र में पिछले चौबीस घंटों के दौरान अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे कई नदियां और जलाशय भर गए हैं। पूर्वी राजस्थान में 11 और 12 अगस्त के दौरान भारी से अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है, जबकि पश्चिमी राजस्थान में भी अनेक स्थानों पर तेज वर्षा, आंधी और बिजली गिरने की आशंका व्यक्त की गई है। प्रशासन ने नदी-नालों के समीप जाने से बचने और अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है।
दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में भी जारी रहेगा वर्षा का दौर
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, हरियाणा और आसपास के इलाकों में भी मानसून की सक्रियता बनी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने दिल्ली और हरियाणा में कई स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की है। इससे तापमान में गिरावट आएगी, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव और यातायात बाधित होने की आशंका भी बनी रहेगी। दूसरी ओर महाराष्ट्र के कई हिस्सों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां गरज-चमक के साथ वर्षा और तेज हवाएं चल सकती हैं। तटीय तथा घाट क्षेत्रों में प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
किसानों के लिए राहत, लेकिन आपदा का खतरा भी बरकरार
लगातार हो रही वर्षा खरीफ फसलों के लिए सामान्य परिस्थितियों में लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि इससे मिट्टी में नमी बढ़ती है और जलाशयों का जलस्तर भी सुधरता है। हालांकि अत्यधिक वर्षा की स्थिति में खेतों में जलभराव, फसलों को नुकसान और ग्रामीण संपर्क मार्ग बाधित होने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिन कृषि और आपदा प्रबंधन, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहेंगे। नागरिकों को नदी-नालों से दूर रहने, मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमानों पर नजर रखने तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।