बेंगलुरु की निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप कंपनी गैलेक्सआई ने वह उपलब्धि हासिल की है, जिसने भारत की तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाई दी है। कंपनी द्वारा विकसित दुनिया का पहला ऑप्टोसार सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च होने के बाद अब उससे संपर्क भी स्थापित कर लिया गया है। यह उपलब्धि केवल एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि भारत के तेजी से उभरते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की ताकत का भी प्रतीक मानी जा रही है।
क्या है ‘मिशन दृष्टि’ की सबसे बड़ी खासियत
‘मिशन दृष्टि’ दुनिया का पहला ऐसा उपग्रह है, जिसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और सिंथेटिक अपर्चर रडार यानी एसएआर तकनीक को एक ही संचालन प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है। अब तक पारंपरिक उपग्रह या तो ऑप्टिकल सेंसर का इस्तेमाल करते थे या फिर रडार तकनीक का। लेकिन इस नई प्रणाली ने दोनों तकनीकों की खूबियों को एक साथ जोड़कर अंतरिक्ष इमेजिंग को पूरी तरह नई दिशा दे दी है।
हर मौसम और हर समय देगा सटीक तस्वीरें
ऑप्टिकल सेंसर सामान्यतः साफ मौसम और धूप में बेहद उच्च गुणवत्ता वाली रंगीन तस्वीरें लेते हैं, लेकिन बादल या अंधेरा होने पर उनकी क्षमता सीमित हो जाती है। वहीं एसएआर तकनीक रेडियो तरंगों की मदद से बादलों और अंधेरे के बीच भी तस्वीरें प्राप्त कर सकती है। ‘मिशन दृष्टि’ में इन दोनों तकनीकों के संयोजन से अब हर मौसम, हर परिस्थिति और दिन-रात लगातार निगरानी संभव हो सकेगी। इससे सीमा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और कृषि निगरानी जैसे क्षेत्रों में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
पांच वर्षों की स्वदेशी रिसर्च का परिणाम
कंपनी के अनुसार इस उपग्रह को विकसित करने में लगभग पांच वर्षों का समय लगा। इस दौरान स्वदेशी रिसर्च, पर्यावरणीय परीक्षण और तकनीकी सत्यापन की लंबी प्रक्रिया पूरी की गई। 190 किलोग्राम वजन वाले इस उपग्रह को कैलिफोर्निया से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया। यह किसी भारतीय निजी कंपनी द्वारा निर्मित अब तक का सबसे बड़ा उपग्रह भी माना जा रहा है।
कृषि से लेकर सीमा सुरक्षा तक बदलेगी तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मिशन दृष्टि’ केवल अंतरिक्ष विज्ञान की उपलब्धि नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसकी मदद से बाढ़, चक्रवात और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी अधिक सटीक ढंग से की जा सकेगी। साथ ही कृषि क्षेत्र में फसल की स्थिति, जल संसाधनों और भूमि उपयोग पर बेहतर डेटा उपलब्ध होगा। सीमा क्षेत्रों में निगरानी क्षमता बढ़ने से सुरक्षा एजेंसियों को भी बड़ी सहायता मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने भी दी बधाई
इस उपलब्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कंपनी को बधाई देते हुए इसे भारत की वैज्ञानिक शक्ति और नवाचार क्षमता का प्रतीक बताया। अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी को भारत की नई तकनीकी क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस तरह की स्वदेशी तकनीक भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में और मजबूत स्थिति दिला सकती है।