नई दिल्ली. देश में रोजगार और आर्थिक विकास को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस ने निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में नई नियुक्तियों में कमी संबंधी एक मीडिया रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर रोजगार सृजन में विफल रहने का आरोप लगाया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि देश का युवा केवल प्रचार और सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित सामग्री से संतुष्ट नहीं होगा, बल्कि उसे सम्मानजनक और स्थायी रोजगार की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि सरकार रोजगार से जुड़े मूल प्रश्नों का समाधान खोजने के बजाय जनध्यान को अन्य मुद्दों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रही है। वहीं, इस विषय पर केंद्र सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
निजी क्षेत्र में नियुक्तियों को लेकर रिपोर्ट का दिया हवाला
जयराम रमेश ने सामाजिक मंच ‘एक्स’ पर साझा अपने वक्तव्य में एक समाचार रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान देश की शीर्ष निजी कंपनियों में नई भर्तियों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। उनके अनुसार, यदि देश की अग्रणी कंपनियों में रोजगार के अवसर घट रहे हैं तो यह व्यापक श्रम बाजार की स्थिति का संकेत हो सकता है। कांग्रेस का कहना है कि रोजगार सृजन की गति को लेकर गंभीर समीक्षा और प्रभावी नीति हस्तक्षेप की आवश्यकता है, ताकि युवाओं के लिए नए अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।
सरकार की आर्थिक नीतियों पर कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की आर्थिक और रोजगार संबंधी नीतियों के कारण देश का रोजगार बाजार दबाव में है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से रोजगार सृजन, निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। उनके अनुसार, यदि रोजगार के अवसर पर्याप्त मात्रा में नहीं बढ़ते हैं तो इसका सीधा प्रभाव युवाओं की आकांक्षाओं और देश की आर्थिक वृद्धि पर पड़ता है। कांग्रेस का दावा है कि रोजगार को नीति निर्माण के केंद्र में रखने की आवश्यकता है।
एमएसएमई क्षेत्र को लेकर भी जताई चिंता
जयराम रमेश ने कहा कि यदि बड़ी कंपनियों में नियुक्तियों की गति धीमी पड़ रही है तो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता स्वाभाविक है। उन्होंने दावा किया कि देश में रोजगार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है और यदि यह क्षेत्र चुनौतियों का सामना करता है तो उसका असर व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन पर पड़ सकता है। कांग्रेस का मत है कि एमएसएमई क्षेत्र को वित्तीय सहायता, आसान ऋण, तकनीकी उन्नयन और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराकर रोजगार के अवसरों में वृद्धि की जा सकती है।
‘हेडलाइन मैनेजमेंट’ के आरोप के साथ साधा राजनीतिक निशाना
कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार संकट का समाधान खोजने के बजाय केवल सुर्खियां प्रबंधन और राजनीतिक विमर्श को अन्य विषयों की ओर मोड़ने में अधिक ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि देश का युवा वास्तविक अवसरों की अपेक्षा रखता है और केवल प्रचारात्मक गतिविधियों से उसकी आकांक्षाएं पूरी नहीं हो सकतीं। अपने वक्तव्य में उन्होंने यह भी कहा कि रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने वाली नीतियां ही युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बना सकती हैं।
रोजगार बना हुआ है प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा
रोजगार का प्रश्न लंबे समय से देश की राजनीति और आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण विषय रहा है। विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर रोजगार के आंकड़ों, निवेश, औद्योगिक विकास और उद्यमिता को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार सृजन, कौशल विकास, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र के विस्तार और निवेश वृद्धि जैसे अनेक कारक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में रोजगार को लेकर उठने वाले राजनीतिक प्रश्नों और सरकारी नीतियों का मूल्यांकन आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों, श्रम बाजार के संकेतकों तथा स्वतंत्र अध्ययनों के आधार पर किया जाता है। आने वाले समय में रोजगार और आर्थिक विकास का मुद्दा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बना रहने की संभावना है।