कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ सांसद काकली घोष दस्तिदार ने बारासात संसदीय जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले उन्हें लोकसभा में पार्टी के चीफ व्हिप पद से भी हटाया गया था। उनके इस कदम ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया है।
चुनावी हार की ‘नैतिक जिम्मेदारी’ लेकर दिया इस्तीफा
23 मई 2026 को प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्शी को भेजे गए पत्र में काकली घोष दस्तिदार ने बारासात जिले में विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन की ‘नैतिक जिम्मेदारी’ लेते हुए पद छोड़ने की बात कही। हालांकि, पत्र में उन्होंने पार्टी की रणनीति और चुनावी प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए।
उन्होंने लिखा कि कठिन राजनीतिक लड़ाइयां “भूइंफोड़ संगठनों” के सहारे नहीं जीती जा सकतीं। माना जा रहा है कि उनका इशारा अभिषेक बनर्जी के करीबी चुनावी रणनीतिकार संगठन I-PAC की ओर था।
I-PAC और नई रणनीति पर उठाए सवाल
काकली घोष दस्तिदार ने अपने पत्र में पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्व देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा कि पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ काम करने से पार्टी की छवि मजबूत होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सीधे तौर पर पार्टी की मौजूदा रणनीति और नए चेहरों को प्राथमिकता देने की नीति पर सवाल है।
अपराध और भ्रष्टाचार पर भी जताई चिंता
इस्तीफे के पत्र में काकली घोष दस्तिदार ने पश्चिम बंगाल में हालिया अपराध और भ्रष्टाचार की घटनाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से आम लोगों में डर और सवाल पैदा हो रहे हैं। उन्होंने राजनीति में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता को मजबूत करने की जरूरत बताई।
‘हाल धरो नेत्री’ पोस्ट से बढ़ी चर्चा
इस्तीफे की चर्चा के बीच काकली घोष दस्तिदार का एक पोस्ट भी चर्चा में आ गया। उन्होंने ममता बनर्जी के लाइव संदेश को साझा करते हुए “हाल धरो नेत्री” लिखकर पोस्ट किया। इसके अलावा उनके फेसबुक पोस्ट और बढ़ी हुई Y+ सुरक्षा को लेकर भी राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।