कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मंगलवार सुबह एक नई हलचल देखने को मिली, जब तृणमूल कांग्रेस सांसद काकली घोष दस्तीदार कल्याणी में आयोजित प्रशासनिक बैठक में पहुंचीं। इस बैठक में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या काकली जल्द ही बीजेपी का दामन थाम सकती हैं?
कल्याणी बैठक में पहुंचीं काकली, अटकलों को मिला बल
सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार सुबह काकली घोष दस्तीदार कल्याणी में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में मौजूद रहीं। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या यह उनकी पार्टी बदलने की तैयारी का संकेत है। हालांकि, काकली घोष दस्तीदार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि उनका इस बैठक में शामिल होना पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था और इसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि सांसद होने के नाते उनकी मौजूदगी स्वाभाविक थी।
तीन जिलों की समीक्षा के लिए हुई बैठक
जानकारी के मुताबिक, इस प्रशासनिक बैठक में नदिया, हुगली और उत्तर 24 परगना जिलों के विकास और प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा की गई। काकली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि वह सांसद के तौर पर इस बैठक में शामिल हुई थीं, न कि किसी राजनीतिक संदेश देने के उद्देश्य से।
पिछले कुछ दिनों से बढ़ रही थीं राजनीतिक चर्चाएं
काकली घोष दस्तीदार के हालिया कदमों ने पहले ही राजनीतिक अटकलों को हवा दे दी थी। लोकसभा में एक अहम पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर पुराने राजनीतिक साथियों और संघर्ष के दिनों को याद करते हुए पोस्ट साझा की थीं। इसके बाद विधानसभा चुनाव में बारासात जिले में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
खुले पत्र से बढ़ा सियासी तापमान
रविवार को मध्यग्राम स्थित पार्टी कार्यालय में अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर काकली ने अपना इस्तीफा सार्वजनिक किया। इतना ही नहीं, उन्होंने पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार, कुछ नेताओं की कथित विलासिता और चुनावी रणनीति में बाहरी ‘वोट कंसल्टेंसी’ संस्थाओं की दखल पर भी नाराजगी जाहिर की। पार्टी नेतृत्व को लिखे खुले पत्र में काकली ने कहा कि हाल के दिनों में अपराध और भ्रष्टाचार की घटनाओं ने आम लोगों में चिंता बढ़ाई है। उन्होंने राजनीति में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदार कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया।
क्या बीजेपी में शामिल होंगी काकली?
फिलहाल काकली घोष दस्तीदार ने बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। लेकिन उनके हालिया राजनीतिक कदम और पार्टी नेतृत्व पर सार्वजनिक नाराजगी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में काकली कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेती हैं या नहीं।