नई दिल्ली. सिख फॉर जस्टिस जैसे खालिस्तानी संगठन अब उत्तर भारत की जेलों में सक्रिय होने के आरोपों में हैं। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक ये संगठन जेलों के अंदर नेटवर्क बनाकर कैदियों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में हिरासत में लिए गए दो संदिग्धों ने बताया है कि उन्हें खालिस्तानी गुरपतवंत सिंह पन्नू का नंबर तक दिया गया था। एजेंसियां जेलों में खालिस्तानी नेटवर्क पैसा पहुंचाने के जरिए और अन्य संपर्क तलाशने में जुटी हुई हैं। 2016 में नाभा जेल ब्रेक के बाद ऐसे नेटवर्क के बारे में जानकारी सामने आई थी।
निशाने पर गरीब और नए कैदी
रिपोर्ट्स के अनुसार खालिस्तानी संगठन ऐसे लोगों को टारगेट करते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हों या पहली बार अपराध करके जेल आए हों। हैंडलर कैदियों को कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाते हैं और पैसे का लालच देते हैं। आम तौर पर उनके निशाने पर गरीब कैदी होते हैं जिन्हें आसानी से प्रभावित किया जा सकता है। जेल के अंदर से संपर्क साधकर उन्हें बाहर निकलने के बाद गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की जाती है। एजेंसियों का मानना है कि इस तरीके से संगठन अपना आधार बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
डेड ड्रॉप फंडिंग का तरीका
एजेंसियों का पता चला है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भी डेड ड्रॉप चैनल के जरिए भारत में हथियार और पैसे भेज रही है। पहले आम तौर पर किसी व्यक्ति के माध्यम से आतंकी फंडिंग की जाती थी लेकिन अब तरीका बदल चुका है। डेड ड्रॉप से मतलब है सीमा पार से ड्रोन द्वारा सामान पहुंचाना। ड्रोन के जरिए किसी सुनसान जगह पर सामग्री गिरा दी जाती है जिसके बाद संबंधित व्यक्ति को जानकारी दी जाती है। इससे पकड़े जाने का खतरा कम रहता है। सीमा पार से ड्रग्स स्मगलिंग भी इसी तरीके से हो रही है जो आतंकी फंडिंग का एक बड़ा जरिया बताया जा रहा है।
हालिया गिरफ्तारियां
हाल ही में एजेंसियों ने सिख फॉर जस्टिस के समर्थन वाले मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है और प्रीतपाल सिंह नाम के ऑपरेटिव को गिरफ्तार किया है। उसके साथ कई अन्य संदिग्धों की भी गिरफ्तारी हुई है। उसने दिल्ली और पंजाब में कई जगहों पर ब्रिक्स के विरोध में नारे लिखे थे और इसका वीडियो पन्नू को भेजा। इसी तरह के मामले में 2023 में भी गिरफ्तारी की गई थी। प्रीतपाल सिंह ने जमानत के बाद बाहर निकलते ही निर्देशों पर काम करना शुरू कर दिया था। एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं।
पन्नू से संपर्क का आरोप
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक एक कैदी को पन्नू का नंबर दिया गया था और कहा गया था कि आगे भी उससे काम लिया जाएगा। वहीं प्रीतपाल सिंह ने सीधे पन्नू से संपर्क किया और उसे 1.5 लाख रुपये दिए गए। यह पैसा डेड ड्रॉप के जरिए ही उसे दिया गया था। इसके बाद प्रीतपाल ने कई अन्य कैदियों को भी प्रभावित करने की कोशिश की। जेल से बाहर आने के बाद उसने निर्देशानुसार गतिविधियां शुरू कर दीं। एजेंसियां इन संपर्कों और फंडिंग के स्रोतों की गहन जांच कर रही हैं।
एजेंसियों की कार्रवाई
खुफिया एजेंसियां जेलों में सक्रिय नेटवर्क को तोड़ने के लिए सक्रिय हैं। पैसा पहुंचाने के नए तरीकों और संपर्क सूत्रों पर नजर रखी जा रही है। गरीब कैदियों को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिशों को रोकने के लिए जेल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां समन्वय बनाकर काम कर रही हैं। हालिया गिरफ्तारियों से मॉड्यूल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे प्रयासों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि जेलों के अंदर से कोई नेटवर्क न फल-फूल सके। जांच जारी है और और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।