दिल्ली. राजधानी के सबसे प्रिय उद्यानों में से एक लोधी गार्डन ने अपने 90 वर्ष पूरे कर लिए हैं। लगभग 80 एकड़ में फैला यह विशाल उद्यान 9 अप्रैल 1936 को तत्कालीन गवर्नर-जनरल की पत्नी के नाम पर ‘लेडी विलिंगडन पार्क’ के रूप में स्थापित किया गया था। समय के साथ इसका नाम बदलकर लोधी गार्डन कर दिया गया और यह आज दिल्लीवासियों के लिए सुकून, स्वास्थ्य और इतिहास का संगम बन चुका है।
आठ शताब्दियों पुरानी हरियाली की विरासत
लोधी गार्डन का इतिहास केवल 90 वर्षों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें करीब 800 वर्ष पुरानी हैं। 13वीं शताब्दी के इतिहासकार मिन्हाज-ए-सिराज जुज़जानी ने इस क्षेत्र को ‘बाग-ए-जद्द’ के रूप में वर्णित किया था, जहां दिल्ली के सुल्तान विदेशी दूतों का स्वागत करते थे। यह स्थान समय के साथ विभिन्न शासकों के काल में विकसित होता गया और एक ऐतिहासिक परिसर का रूप लेता गया।
शाही स्मारकों का अद्भुत संग्रह
इस उद्यान में सैयद, लोधी और मुगल वंश के कालखंड से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्मारक मौजूद हैं। इनमें मोहम्मद शाह का मकबरा, बड़ा गुंबद, शीश गुंबद और सिकंदर लोधी का मकबरा प्रमुख हैं। इसके अलावा अकबर कालीन पुल, तीन जलाशय, बोनसाई और औषधीय उद्यान भी यहां की विशेषताओं में शामिल हैं, जो इसे केवल एक पार्क नहीं, बल्कि जीवंत इतिहास बनाते हैं।
संस्कृति और सिनेमा का प्रिय स्थल
लोधी गार्डन केवल ऐतिहासिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि यह सांस्कृतिक और फिल्मी दुनिया का भी अहम हिस्सा रहा है। 1981 की चर्चित फिल्म चश्मे बद्दूर में यह स्थान रोमांटिक दृश्यों की पृष्ठभूमि बना था, जिसने इसे और अधिक लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद भी कई फिल्मों और धारावाहिकों में इसकी सुंदरता को दर्शाया गया है।
जनजीवन का अभिन्न हिस्सा
आज लोधी गार्डन सुबह की सैर करने वालों, योग साधकों, युवाओं और शांति की तलाश करने वाले लोगों का पसंदीदा स्थल बन चुका है। यहां की हरियाली, खुला वातावरण और ऐतिहासिक स्मारक लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से संतुलित जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं।
विकास और विस्थापन की अनकही कहानी
इस उद्यान के निर्माण के पीछे कुछ ऐसी कहानियां भी जुड़ी हैं, जो कम चर्चा में रहती हैं। बताया जाता है कि इसके विकास के दौरान खैरपुर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों को विस्थापित किया गया था। इस घटना से जुड़ी कई लोककथाएं भी प्रचलित हैं, जो इस स्थान के इतिहास को और रहस्यमय बनाती हैं।
इतिहास, प्रकृति और समय का संगम
लोधी गार्डन आज केवल एक पार्क नहीं, बल्कि समय के साथ विकसित हुई एक जीवंत धरोहर है। यह स्थान इतिहास, प्रकृति और आधुनिक जीवन के बीच संतुलन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। 90 वर्षों की यात्रा पूरी करने के बाद भी यह उद्यान अपनी ताजगी, आकर्षण और महत्व को बनाए हुए है।