भारत की समृद्ध लोक-संस्कृति में लोहड़ी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत—पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश—में बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। लोहड़ी केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज, प्रकृति और मानव श्रम के बीच एक जीवंत संवाद का प्रतीक है। सर्द ऋतु की विदाई और आने वाले कृषि समृद्धि काल का स्वागत इस पर्व का मूल भाव है।
कृषि जीवन से जुड़ा उत्सव और आशा
लोहड़ी का सीधा संबंध कृषि चक्र से जुड़ा हुआ है। यह वह समय होता है जब रबी की फसलें, विशेषकर गेहूं, खेतों में हरी चादर की तरह लहलहाने लगती हैं। किसान अपने परिश्रम के सकारात्मक संकेत देखकर संतोष और आनंद का अनुभव करते हैं। लोहड़ी की अग्नि के चारों ओर तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी और मक्का अर्पित करना प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आने वाली समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है।
अग्नि का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
भारतीय परंपरा में अग्नि को शुद्धि, ऊर्जा और साक्षात देवता का स्वरूप माना गया है। लोहड़ी की रात प्रज्वलित की जाने वाली पवित्र अग्नि में आहुति देकर लोग नकारात्मकता, रोग और दुर्भाग्य के नाश की प्रार्थना करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से यह पर्व सूर्य के उत्तरायण की ओर बढ़ने का संकेत भी देता है, जब सूर्य की ऊर्जा पुनः जीवनदायिनी रूप में पृथ्वी पर प्रभावी होने लगती है। यह मानव को प्रकृति की लय के साथ सामंजस्य बनाकर चलने की प्रेरणा देता है।
लोकगीत, नृत्य और सामूहिक आनंद
लोहड़ी लोक-संस्कृति का सजीव उत्सव है, जिसमें गीत, संगीत और नृत्य का विशेष स्थान है। “सुंदर मुंदरिए हो…” जैसे पारंपरिक लोकगीत, भांगड़ा और गिद्धा की थाप पर थिरकते कदम पूरे वातावरण को उल्लास से भर देते हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्ग—सभी एक ही अग्नि के चारों ओर एकत्र होकर सामूहिकता और अपनत्व का अनुभव करते हैं। यह पर्व समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक कड़ी के रूप में कार्य करता है।
सामाजिक एकता और पारिवारिक परंपराएँ
लोहड़ी सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का भी पर्व है। नवविवाहित दंपति और नवजात शिशु की पहली लोहड़ी का विशेष महत्व होता है, जिसे परिवार और समुदाय मिलकर धूमधाम से मनाते हैं। उपहार, मिठाइयाँ और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान आपसी संबंधों में मधुरता और सामूहिक खुशी को बढ़ाता है। यह पर्व सिखाता है कि खुशियाँ साझा करने से समाज और अधिक सशक्त बनता है।
आधुनिक युग में लोहड़ी का संदेश
आज के तेज़-रफ्तार और डिजिटल युग में लोहड़ी हमें मिट्टी से जुड़ाव, परिश्रम के सम्मान और सामूहिक जीवन मूल्यों की याद दिलाती है। यह पर्व सस्टेनेबल जीवनशैली का भी संदेश देता है, जहाँ प्रकृति, किसान और समाज के बीच संतुलन बना रहे। लोहड़ी अग्नि की लौ में जलती आस्था, खेतों में लहलहाती उम्मीद और लोकगीतों में गूंजती संस्कृति का उत्सव है। यह हमें सिखाती है कि जीवन का वास्तविक आनंद तभी संभव है जब मानव, प्रकृति और परंपरा एक-दूसरे के साथ तालमेल में हों।
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