पुणे: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, मूल्यांकन में गड़बड़ी और परिणामों में देरी को लेकर प्रतियोगी छात्रों का गुस्सा सोमवार को पुणे की सड़कों पर दिखाई दिया। हजारों परीक्षार्थियों ने ‘विद्यार्थी आक्रोश मोर्चा’ निकालकर आयोग और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। ओंकारेश्वर मंदिर चौक से शुरू हुआ मार्च पुणे जिला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा। बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने के कारण मध्य पुणे के कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ। कलेक्टर कार्यालय के बाहर छात्रों ने प्रदर्शन करते हुए MPSC के चेयरमैन विवेक भीमनवार और सचिव के इस्तीफे की मांग की। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि लगातार सामने आ रहे विवादों से आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के पेपर लीक से बढ़ा आक्रोश
छात्रों के मौजूदा आंदोलन की प्रमुख वजह हालिया ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-B) परीक्षा में कथित पेपर लीक को बताया जा रहा है। आरोप है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र कुछ लोगों तक पहुंच गया था। मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। जांच के दौरान MPSC के गोपनीय अनुभाग से जुड़े कर्मचारियों और अन्य लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। गिरफ्तार लोगों में एक कोचिंग संस्थान से जुड़े व्यक्ति और एक महिला अभ्यर्थी के शामिल होने का भी दावा किया गया है। छात्रों की मांग है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में कथित पेपर लीक हुआ, उनके कार्यकाल के दौरान आयोजित अन्य परीक्षाओं की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कहीं परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी तो नहीं हुई।
12 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन
आंदोलनकारी छात्रों और परीक्षा समन्वयकों ने प्रशासन को अपनी मांगों से जुड़ा विस्तृत दस्तावेज सौंपा। छात्रों की ओर से 12 सूत्रीय मांग पत्र दिए जाने की बात कही गई है। इनमें MPSC चेयरमैन और सचिव को हटाने, पेपर लीक से जुड़ी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और भर्ती परीक्षाओं के मूल्यांकन में सामने आई कथित त्रुटियों की उच्चस्तरीय जांच कराने जैसी मांगें शामिल हैं। छात्रों ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 और कृषि सेवा परीक्षाओं के वर्णनात्मक उत्तरपत्रों के मूल्यांकन में कथित गलतियों की भी जांच की मांग की है। आंदोलनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है।
सुप्रिया सुले और रोहित पवार समेत विपक्षी नेता छात्रों के साथ
पुणे में हुए प्रदर्शन को विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला। NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले, विधायक रोहित पवार, कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम और शिवसेना (UBT) से जुड़े नेता प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। सुप्रिया सुले ने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से छात्रों के साथ सीधे संवाद की मांग की। विपक्षी नेताओं ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया के जरिए आंदोलनकारी छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने पेपर लीक, भर्ती में देरी और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। हालांकि, विपक्षी दलों के समर्थन के कारण आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। सरकार और MPSC की ओर से लगाए गए आरोपों पर अलग-अलग पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।
MPSC चेयरमैन ने पेपर लीक मामले में दी सफाई
विवाद के बीच MPSC चेयरमैन विवेक भीमनवार ने अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि जिस ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आया, उसकी प्रक्रिया उनके पदभार संभालने से पहले की थी। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग ने मामले को दबाने के बजाय खुद पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी। ऐसे में आयोग की ओर से मामले में कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है। अब छात्रों की मांगों और पेपर लीक मामले की जांच के बीच सरकार के अगले कदम पर सभी की नजर है। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करना सबसे जरूरी है।