नई दिल्ली. पेट्रोल में एथनॉल मिलाने को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इससे वाहनों को नुकसान होने के दावे सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एथनॉल ब्लेंडिंग सिर्फ पेट्रोल की जरूरत पूरी करने का माध्यम नहीं है बल्कि इससे कृषि क्षेत्र में विविधता आएगी और किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे। गडकरी ने जोर देकर कहा कि इस पॉलिसी का मकसद न सिर्फ पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना है बल्कि कृषि उत्पादों के लिए एक नया बाजार बनाना भी है। उनके बयान ने पूरे विवाद पर सकारात्मक रोशनी डाली है।
वाहनों को नुकसान के दावों पर चुनौती
गडकरी ने कहा कि मैं किसी को भी चुनौती देता हूं कि वे आकर शिकायत करें कि उनकी गाड़ी को इस वजह से नुकसान पहुंचा है। बेशक जिनके अपने स्वार्थ हैं उनकी कहानी कुछ और हो सकती है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग का मंत्री होने के नाते मैं जानता हूं कि सभी प्रमुख वाहन कंपनियों ने अपने वाहनों को सौ प्रतिशत एथनॉल के जरिये चलाकर भी देखा है और कोई शिकायत सामने नहीं आई है। वर्ष 2022 से चार करोड़ चार-पहिया और बीस करोड़ दोपहिया वाहन एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के माध्यम से चल रहे हैं। मैं किसी को भी चुनौती देता हूं कि वह शिकायत करके दिखाए कि इसके कारण उसके वाहन को नुकसान हुआ है। निहित स्वार्थ वाले लोग कोई और कहानी बता सकते हैं।
किसानों को ऊर्जादाता बनाने का लक्ष्य
गडकरी ने कहा कि हमें समझना होगा कि पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का फैसला कृषि को ऊर्जा और बिजली क्षेत्र की दिशा में विविधीकृत करने के उद्देश्य से लिया गया था। हमारे किसान अब केवल अन्नदाता ही नहीं बल्कि ऊर्जादाता भी बनेंगे। केंद्र सरकार द्वारा मक्के से एथनॉल बनाने और उसके इस्तेमाल का फैसला किए जाने के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के किसानों की अतिरिक्त आय में पैंतालीस हजार करोड़ रुपये तक की वृद्धि हुई। यह आंकड़ा किसानों के लिए इस नीति के प्रत्यक्ष लाभ को दर्शाता है। कृषि उत्पादों को ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
पारंपरिक ईंधन आयात पर प्रभाव
गडकरी ने कहा कि भारत बाईस लाख करोड़ रुपये मूल्य के पारंपरिक ईंधन का आयात कर रहा है और जिन लोगों को लगता है कि उनके कारोबार पर इसका असर पड़ेगा वे निश्चित तौर पर इससे चिंतित होंगे। एथनॉल ब्लेंडिंग से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने का यह कदम देश की अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक फायदेमंद है। मंत्री के अनुसार स्वदेशी संसाधनों का उपयोग बढ़ाकर आयात बिल में कमी लाई जा सकती है। यह नीति आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
कृषि विविधीकरण और भविष्य की संभावनाएं
एथनॉल ब्लेंडिंग नीति कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है। किसानों को अनाज के अलावा ऊर्जा उत्पादन से जुड़ने का मौका मिल रहा है। मक्का जैसी फसलों से एथनॉल बनाने से अतिरिक्त आय का स्रोत बना है। गडकरी के बयान से स्पष्ट है कि सरकार इस दिशा में प्रतिबद्ध है और आलोचनाओं का जवाब तथ्यों से दे रही है। वाहन निर्माता कंपनियों के परीक्षणों में कोई समस्या नहीं आने से नीति की मजबूती साबित होती है। आगे भी इस कार्यक्रम को विस्तार देने की योजना है जिससे ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाभ पहुंचे।