नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित 'सेवा संकल्प अभियान' के मंच से देशवासियों को नए उत्साह और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने के लिए एक नया नारा—"वी विल डू इट" (We Will Do It) दिया है। 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी ने सरकार के प्रमुख के तौर पर अपनी 25 साल की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर ली है। इस खास मौके पर समर्थकों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन केवल पुरानी यादों में बहने का नहीं, बल्कि नए सामर्थ्य के साथ पुराने संकल्पों को मजबूत करने का है।
पीएम मोदी का संबोधन: 'पुराने संकल्पों को नई ताकत देने का दिन'
विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "मेरी इस लंबी प्रशासनिक यात्रा के हर पड़ाव पर देश के सभी कार्यकर्ताओं और देशवासियों का समर्थन बेजोड़ रहा है। आज का यह विशेष दिन सिर्फ अतीत की यादों में खो जाने का नहीं है, बल्कि यह हमारे पुराने संकल्पों को नई ऊर्जा से भरने का दिन है। यह दिन नए आत्मविश्वास के साथ उसी प्रतिज्ञा को दोहराने का अवसर है।"
प्रधानमंत्री ने तय किए देश के लिए 3 बड़े लक्ष्य
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश के विकास और वैश्विक स्तर पर भारत की साख मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया:
- तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना: 2014 में जब उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला था, तब भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर 10वें स्थान पर थी। अब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- स्वदेशी तकनीक से मानव अंतरिक्ष अभियान: पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक का उपयोग कर मानव को अंतरिक्ष में भेजना और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करना।
- ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब और ओलंपिक का आयोजन: भारत को दुनिया का प्रमुख विनिर्माण केंद्र बनाना और भविष्य में देश में ओलंपिक खेलों की मेजबानी करना।
कठिन राजनीतिक परिस्थितियों के बीच बढ़ा कार्यकर्ताओं का उत्साह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशासक के रूप में पीएम मोदी के 25 साल पूरे होने का यह पड़ाव ऐसे समय आया है जब सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में शिक्षा आंदोलन और युवा विरोध प्रदर्शनों के दबाव में जुलाई महीने में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा देना पड़ा था। इसके अलावा, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर विपक्षी दलों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का विरोध प्रदर्शन भी जारी है।
चुनावी और राजनीतिक मोर्चे पर आक्रामक तेवर
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस कठिन राजनीतिक माहौल और विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री मोदी का यह आत्मविश्वास से भरा आक्रामक भाषण भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए संजीवनी का काम करेगा। 'वी विल डू इट' के नारे ने पार्टी कैडर में भारी उत्साह भर दिया है और आने वाले दिनों में यह सरकार के विकास एजेंडे को नई गति देने में मददगार साबित होगा।