नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 2047 तक विकसित भारत बनाने के अपने पक्के इरादे को दोहराया। सरकार के प्रमुख के तौर पर अपने 25 साल के कार्यकाल पर बात करते हुए उन्होंने कहा हम यह करके रहेंगे हम यह करके रहेंगे। सरकार के प्रमुख के तौर पर लगातार 25 साल की सेवा पूरी होने के मौके पर राजधानी के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित सेवा ज्योति कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने एक भावुक बयान दिया। उन्होंने उन सभी लोगों और घटनाओं के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनके सफर को आकार दिया। आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो मन में सिर्फ आभार का भाव आता है। मैं हर उस व्यक्ति और हर उस घटना का आभारी हूं जिसने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है।
हर अनुभव से मिली सीख
उन्होंने अच्छे और मुश्किल दोनों तरह के अनुभवों से मिली सीख के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा जिसने मुझे जीत दिलाई उसने मुझे विनम्र रहना सिखाया जिसने मुझे गिराया उसने मुझे फिर से उठना सिखाया। शुभचिंतकों ने मेरा हौसला बढ़ाया और आलोचकों ने मुझे अपने भीतर झांकना सिखाया। जिसने मेरा साथ दिया उसने मुझे भरोसे की ताकत दिखाई जिसने मेरा विरोध किया उसने मुझे लोकतंत्र की ताकत समझाई। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे कभी अकेलापन महसूस नहीं हुआ। ऐसे अनगिनत स्वयंसेवक हैं जो भारत की सांस्कृतिक आत्मा के रक्षक हैं और जिनका एकमात्र मकसद है भारत की सेवा करना। वे इसी भावना के साथ जीते हैं और हर पल खुद को याद दिलाते हैं हम सेवक हैं हम मानवता के सेवक हैं।
खास घटनाओं से मिली प्रेरणा
पीएम मोदी ने उन खास घटनाओं का जिक्र किया जिनसे उन्हें सीखने को मिला जैसे 2001 का भुज भूकंप जिसने मुझे पुनर्निर्माण के काम में डटे रहना सिखाया चंद्रयान मिशन जिसने मुझे असफलता से उबरना सिखाया और कोरोना महामारी जिसने मुझे देश की सामूहिक चेतना के महत्व का एहसास कराया। उन्होंने मीडिया का भी शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने उन्हें खट्टे-मीठे अनुभवों के बीच आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सांस्कृतिक विरासत और महान विचारों से समृद्ध देश की सेवा करने से उन्हें हमेशा ताकत मिली है। वेदों से लेकर विवेकानंद तक जिस देश ने लगातार महान विचारों को अपनाया है जिस देश की सांस्कृतिक विरासत हजारों साल पुरानी है ऐसे देश की सेवा करते हुए मुझे कभी भी अकेलापन महसूस नहीं हुआ।
विकसित भारत का संकल्प
सभा में पीएम मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का पक्का इरादा दोहराया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को नमन करते हुए कहा कि उनकी निष्ठा और सेवा भाव देश की सबसे बड़ी ताकत है। जन सेवा के 25 साल के सफर को उन्होंने व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। हर चुनौती ने उन्हें मजबूत बनाया और हर सहयोग ने आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने देशवासियों से संकल्प लेने की अपील की।
सेवा भाव और आगे की राह
पीएम मोदी ने सेवा को अपना धर्म बताते हुए कहा कि देश की सेवा करते हुए उन्हें कभी अकेलापन महसूस नहीं हुआ। अनगिनत कार्यकर्ताओं का समर्पण उनकी प्रेरणा का स्रोत है। 25 साल की निरंतर सेवा के इस मौके पर उन्होंने अतीत की सीखों को भविष्य के संकल्प से जोड़ा। 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य उनके मिशन का केंद्र है। सभा में दिए गए इस संबोधन ने आभार संकल्प और सेवा भाव को एक साथ प्रस्तुत किया। देशवासियों के आशीर्वाद को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए उन्होंने आगे की यात्रा जारी रखने का संकल्प लिया।