नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात के 138वें एपिसोड में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि इस साल की शुरुआत सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से की गई थी। आज से एक हजार साल पहले 1026 में महमूद गजनी ने पहली बार सोमनाथ मंदिर को विध्वंस किया था। जो लोग सोमनाथ मंदिर को तोड़कर भारत की पहचान मिटाने आए थे आज उनका कोई वजूद भी नहीं है। आज सोमनाथ मंदिर पूरी भव्यता के साथ विशाल समुद्र के किनारे भारत को अमरता का आशीर्वाद दे रहा है। इसलिए इस साल सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया। प्रधानमंत्री के इन शब्दों ने इतिहास और वर्तमान को जोड़ते हुए देश की सांस्कृतिक शक्ति को रेखांकित किया।
1026 में गजनी का आक्रमण और मंदिर का विध्वंस
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 1026 में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर का विध्वंस किया गया था। उसी साल गुजरात के मोढेरा में प्रसिद्ध सूर्य मंदिर पर भी हमला हुआ था और मंदिर को तोड़ा गया था। यानी मोढेरा मंदिर के विध्वंस को भी एक हजार साल पूरे हो गए हैं। जब इतना बड़ा आक्रमण हुआ हो सोमनाथ मंदिर जैसा आस्था का इतना बड़ा केंद्र खंडित किया गया हो और कई जगहों पर भी हमले हुए हों तो किसी भी समाज या शासन का मनोबल टूट सकता था। लेकिन भारत की धरती पर ऐसी स्थिति नहीं बनी। आस्था और संस्कृति को मिटाने के प्रयासों के बावजूद देश की आत्मा अडिग रही। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की अअटूट जीवटता का प्रमाण बताया।
मोढेरा सूर्य मंदिर की कहानी
मोढेरा सूर्य मंदिर का निर्माण 1025 में राजा भीमदेव ने कराया था। जब मंदिर तोड़ा गया तब उसका निर्माण हुए सिर्फ एक साल ही हुआ था। प्रधानमंत्री ने बताया कि राजा भीमदेव प्रथम ने न केवल गजनी का मुकाबला किया बल्कि कुछ ही समय में मोढेरा सूर्य मंदिर का पुनर्निर्माण भी करवा दिया। बाद के कालखंड में भी मोढेरा मंदिर पर हमले रुके नहीं। अलाउद्दीन खिलजी ने वास्तुकला के इस भव्य मंदिर को तोड़ दिया था। इसके बावजूद मंदिर की महत्ता और आस्था कम नहीं हुई। आज मोढेरा सिर्फ सूर्य मंदिर के लिए ही नहीं जाना जाता बल्कि देश का प्रथम सूर्य ग्राम यानी सोलर विलेज बन चुका है।
राजा भीमदेव की जीवटता
राजा भीमदेव प्रथम की जीवटता का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब इतना बड़ा आक्रमण हुआ और आस्था के केंद्र खंडित किए गए तब भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने गजनी का मुकाबला किया और क्षतिग्रस्त मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। यह घटना भारत की उस परंपरा को दर्शाती है जिसमें विनाश के बाद भी निर्माण की शक्ति कभी कम नहीं होती। समाज का मनोबल टूटने के बजाय और मजबूत हुआ। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बताया। ऐसी जीवटता ही देश को बार-बार उठने की प्रेरणा देती रही है।
बार-बार पुनर्निर्माण की परंपरा
सोमनाथ मंदिर का इतिहास बार-बार विध्वंस और पुनर्निर्माण का इतिहास है। इसी जीवटता के कारण बार-बार विध्वंस के बाद भी सोमनाथ मंदिर का निर्माण होता रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लोग सूर्य की उपासना सिर्फ मंदिर और वास्तुकला से नहीं करते। हमारी सूर्य उपासना का अर्थ होता है प्रकाश ऊर्जा विज्ञान और निरंतरता की प्रेरणा। इसलिए मोढेरा आज सिर्फ सूर्य मंदिर के लिए ही नहीं जाना जाता है बल्कि देश का प्रथम सोलर विलेज बन चुका है। यह बदलाव दर्शाता है कि आस्था और आधुनिक विकास एक साथ चल सकते हैं। प्राचीन विरासत को संजोते हुए भविष्य की ओर बढ़ना भारत की विशेषता है।
आज की प्रासंगिकता और संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के इस एपिसोड ने सोमनाथ और मोढेरा की गाथा के माध्यम से देशवासियों को आत्मगौरव का संदेश दिया। एक हजार साल पहले हुई घटनाओं को याद करते हुए उन्होंने वर्तमान में भारत की अटूट पहचान को रेखांकित किया। जो शक्तियां पहचान मिटाने आई थीं वे इतिहास के पन्नों में खो गईं लेकिन मंदिर और आस्था आज भी जीवित हैं। यह संदेश युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है कि संस्कृति और विश्वास को कोई मिटा नहीं सकता। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के माध्यम से देश अपनी जड़ों से जुड़ने का संकल्प दोहरा रहा है।