नई दिल्ली. डिजिटल युग में सोशल मीडिया सूचना का सबसे तेज माध्यम बन चुका है, लेकिन इसके साथ फर्जी खबरों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में एक वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 30 जून 2026 से देश में प्रचलित सभी कागजी नोटों को वापस लेकर उनकी जगह प्लास्टिक करेंसी नोट जारी करने वाला है। इस दावे ने आम लोगों के बीच भ्रम और चिंता पैदा कर दी। बड़ी संख्या में लोग इस खबर को सच मानकर शेयर करने लगे, जिसके बाद सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी को हस्तक्षेप करना पड़ा।
क्या था वायरल दावा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित पोस्ट में कहा गया कि आरबीआई ने देश की मुद्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है और जल्द ही कागज आधारित नोटों का चलन समाप्त कर दिया जाएगा। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि प्लास्टिक नोट अधिक टिकाऊ और सुरक्षित होंगे, इसलिए उन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज, अधिसूचना या आरबीआई का बयान प्रस्तुत नहीं किया गया था।
PIB फैक्ट चेक ने किया दावे का खंडन
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने वायरल हो रहे इस दावे की जांच के बाद स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह भ्रामक और फर्जी सूचना है। PIB ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी बयान में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से ऐसी कोई योजना घोषित नहीं की गई है। न तो मौजूदा कागजी नोट वापस लेने का निर्णय हुआ है और न ही उन्हें प्लास्टिक नोटों से बदलने की कोई आधिकारिक घोषणा की गई है। PIB ने लोगों से अपील की कि वे केवल प्रमाणित और आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।
RBI की आधिकारिक जानकारी पर ही करें भरोसा
भारतीय रिजर्व बैंक देश की मौद्रिक व्यवस्था और मुद्रा प्रबंधन का सर्वोच्च संस्थान है। नोटों से जुड़ा कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय आरबीआई द्वारा औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति, अधिसूचना या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से सार्वजनिक किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में मुद्रा प्रणाली में किसी प्रकार का बड़ा बदलाव किया जाता है तो उसकी विस्तृत जानकारी पहले से सार्वजनिक की जाएगी। इसलिए सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट संदेशों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
फर्जी खबरों से सतर्क रहने की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी फर्जी खबरें लोगों में अनावश्यक घबराहट पैदा कर सकती हैं। कई बार ऐसी अफवाहें आर्थिक गतिविधियों और जनविश्वास को भी प्रभावित करती हैं। PIB ने लोगों से आग्रह किया है कि किसी भी वायरल संदेश को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। यदि कोई संदिग्ध या भ्रामक पोस्ट सरकारी नीतियों के नाम पर प्रसारित हो रही हो, तो उसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए ताकि गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सके।
डिजिटल दौर में फैक्ट चेकिंग का बढ़ा महत्व
इंटरनेट और सोशल मीडिया के विस्तार के साथ सूचना की गति बढ़ी है, लेकिन इसके साथ गलत सूचनाओं का प्रसार भी आसान हुआ है। ऐसे समय में PIB फैक्ट चेक जैसी संस्थाएं नागरिकों को सही जानकारी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़ी सरकारी घोषणा पर विश्वास करने से पहले संबंधित मंत्रालय, विभाग या आरबीआई जैसी आधिकारिक संस्थाओं की वेबसाइट और सत्यापित सोशल मीडिया हैंडल अवश्य देखना चाहिए। जागरूकता और सतर्कता ही फेक न्यूज के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है।