उत्तर भारत इन दिनों मौसम के बेहद असामान्य और विरोधाभासी स्वरूप का साक्षी बन रहा है। एक ओर ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी से सर्दी का एहसास लौट आया है, तो दूसरी ओर मैदानी क्षेत्रों में सूरज आग बरसा रहा है। जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तराखंड तक मौसम ने अचानक करवट लेकर लोगों को चौंका दिया है। जहां पर्वतीय इलाकों में तापमान तेजी से नीचे गिरा है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। मौसम के इस दोहरे रूप ने वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
द्रास और जोजिला में बर्फबारी से लौटी ठंड
जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी ने पूरे वातावरण को शीतल बना दिया है। द्रास सेक्टर, जोजिला दर्रे और मिनामार्ग के ऊपरी इलाकों में हुई बर्फबारी के बाद पहाड़ों ने फिर से सफेद चादर ओढ़ ली है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर बर्फ की परत जम गई है और ठंडी हवाओं ने तापमान में उल्लेखनीय गिरावट ला दी है। पिछले कुछ दिनों से वर्षा और तेज हवाओं का सामना कर रहे इन क्षेत्रों में बर्फबारी ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया है। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों का दृश्य एक बार फिर शीतकाल जैसा दिखाई देने लगा है।
प्रशासन की नजर, फिलहाल यातायात सामान्य
बर्फबारी के बावजूद राहत की बात यह रही कि प्रमुख मार्गों पर यातायात सामान्य बना हुआ है। हालांकि प्रशासन ने ऊंचाई वाले संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी हुई है। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को सावधानी बरतने और मौसम संबंधी सलाह का पालन करने की हिदायत दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति के अनुसार परिस्थितियों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
जम्मू में भीषण गर्मी ने बढ़ाई परेशानी
जहां पहाड़ों पर बर्फ गिर रही है, वहीं जम्मू संभाग भीषण गर्मी की चपेट में है। सोमवार को जम्मू का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा दिखाई दिया और लोग तेज धूप से बचने के लिए घरों में रहने को मजबूर रहे। गर्म हवाओं और बढ़ते तापमान ने बुजुर्गों, बच्चों तथा बाहर काम करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए लू की चेतावनी जारी की है, जिससे आने वाले दिनों में गर्मी का असर और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
कश्मीर घाटी में बारिश और बर्फ का मिला-जुला असर
कश्मीर घाटी और उससे सटे पर्वतीय क्षेत्रों में हाल के दिनों में वर्षा, तेज हवाओं और बर्फबारी का संयुक्त प्रभाव देखने को मिला है। मौसम में आए इस बदलाव से जहां तापमान में कमी आई है, वहीं कई इलाकों में सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। कृषि और बागवानी क्षेत्र से जुड़े लोग मौसम की इस स्थिति पर विशेष नजर बनाए हुए हैं क्योंकि अचानक होने वाले बदलाव फसलों और फलों के उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी ने प्राकृतिक सौंदर्य को और अधिक आकर्षक बना दिया है।
बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बदला मौसम का मिजाज
उत्तराखंड के प्रसिद्ध हिमालयी तीर्थ क्षेत्रों बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में भी मौसम ने अचानक करवट ले ली है। ताजा बर्फबारी के बाद इन क्षेत्रों में तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। ऊंची चोटियों और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों पर बर्फ की नई परत दिखाई देने लगी है, जिससे वातावरण में ठंडक बढ़ गई है। तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को मौसम में आए इस बदलाव के अनुसार अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बर्फबारी ने इन क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता को और अधिक मनमोहक बना दिया है।
जलवायु के बदलते संकेतों पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही समय में अत्यधिक गर्मी और बर्फबारी जैसी घटनाएं मौसम के बदलते पैटर्न की ओर संकेत करती हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम की चरम स्थितियां अधिक बार देखने को मिली हैं। कभी असामान्य गर्मी, कभी अचानक भारी वर्षा और कभी मौसम से बाहर बर्फबारी जैसी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर नए प्रश्न खड़े कर रही हैं। वैज्ञानिक लगातार इन परिवर्तनों का अध्ययन कर रहे हैं ताकि भविष्य की चुनौतियों का बेहतर अनुमान लगाया जा सके।
अगले कुछ दिन रह सकते हैं चुनौतीपूर्ण
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में मौसम का यह उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी और वर्षा की संभावना बनी हुई है, जबकि मैदानी इलाकों में गर्मी और लू का प्रभाव जारी रह सकता है। ऐसे में नागरिकों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने, पर्याप्त पानी पीने, अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। फिलहाल उत्तर भारत में मौसम का यह अनोखा संगम लोगों के लिए आश्चर्य और चुनौती दोनों का विषय बना हुआ है।