नई दिल्ली। दुनिया भर में बढ़ती गर्मी के बीच अब मौसम वैज्ञानिकों ने सुपर अल-नीनो को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक 9 मई के बाद मौसम का मिजाज तेजी से बदल सकता है। आने वाले दिनों में भीषण गर्मी, तेज आंधी, बेमौसम बारिश और तूफानों की घटनाएं बढ़ सकती हैं। भारत समेत कई देशों में इसका असर देखने को मिल सकता है।
क्या है सुपर अल-नीनो?
अल-नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है, जो प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने पर पैदा होती है। जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तो उसे “सुपर अल-नीनो” कहा जाता है।वैज्ञानिकों का दावा है कि साल 2026 में बनने वाला अल-नीनो पिछले 140 वर्षों में सबसे शक्तिशाली साबित हो सकता है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सुपर अल-नीनो सक्रिय होने के बाद भारत में:
तापमान तेजी से बढ़ सकता है
कई राज्यों में हीटवेव चल सकती है
अचानक आंधी और बारिश की घटनाएं बढ़ सकती हैं
मानसून कमजोर पड़ सकता है
सूखे जैसे हालात बन सकते हैं
अप्रैल में ही देश के कई हिस्सों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। हालांकि मई की शुरुआत में बारिश से राहत मिली, लेकिन अब फिर गर्मी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
IMD और वैश्विक एजेंसियों की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मई 2026 के पूर्वानुमान में कहा है कि:
गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और उत्तर-पश्चिम भारत में भीषण गर्मी पड़ सकती है
कई इलाकों में रात का तापमान भी सामान्य से ज्यादा रहेगा
कुछ राज्यों में तेज बारिश और तूफान भी आ सकते हैं
वहीं विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कहा है कि मई से जुलाई 2026 के बीच अल-नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की 61 प्रतिशत संभावना है।
मानसून पर भी खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार सुपर अल-नीनो का सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ सकता है। प्रशांत महासागर का बढ़ता तापमान भारतीय मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश सामान्य से कम हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अभी से जल संरक्षण और सिंचाई की तैयारी शुरू करने की सलाह दी है।
ग्लोबल वार्मिंग से और बढ़ा खतरा
वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी पहले से ही ग्लोबल वार्मिंग के कारण ज्यादा गर्म हो चुकी है। ऐसे में सुपर अल-नीनो तापमान को और खतरनाक स्तर तक पहुंचा सकता है। नासा और NOAA के वैज्ञानिकों के मुताबिक दुनिया का औसत तापमान पहले ही 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और अल-नीनो इसे और बढ़ा सकता है।