नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त और पार्टी के भीतर सांसदों-विधायकों की मची चौतरफा भगदड़ के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्तित्व पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है। इस महा-संकट से पार पाने के लिए अब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस का दामन थामने की कवायद तेज कर दी है। मंगलवार को 10, जनपथ पर सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की लंबी मुलाकात के ठीक अगले दिन, यानी बुधवार को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मिलने पहुँचे।
10, जनपथ पर राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच करीब डेढ़ घंटे (90 मिनट) तक बंद कमरे में मैराथन बैठक हुई। दो दिनों के भीतर दोनों पार्टियों के शीर्ष चार नेताओं की इस बैक-टू-बैक मुलाकात ने देश और राज्य की राजनीति में कयासों का बाजार बेहद गर्म कर दिया है।
बैठक के भीतर क्या हुई चर्चा?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच बंगाल की मौजूदा डांवाडोल राजनीतिक स्थिति, टीएमसी के भीतर जारी ऐतिहासिक बगावत, पार्टी के भविष्य और विपक्षी राजनीति के नए समीकरणों को लेकर बेहद गंभीर चर्चा हुई। टीएमसी के सूत्रों का दावा है कि इस बैठक का मुख्य एजेंडा विपक्षी एकजुटता को मजबूत करना और 'INDIA' गठबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर धार देना था। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक की इनसाइड स्टोरी कुछ और ही बयां कर रही है।
कभी उड़ाते थे मजाक, अब 'खूंटे' की तरह पकड़ा 'हाथ'
राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि कल तक जिस कांग्रेस को अभिषेक बनर्जी और टीएमसी के अन्य नेता 'जमींदारी मानसिकता' वाली पार्टी कहकर कोसते थे और सार्वजनिक मंचों से उसका मजाक उड़ाते थे, आज उसी कांग्रेस का हाथ वे तिनके के सहारे की तरह पकड़ने को मजबूर हैं।
एक समय था जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को दरकिनार कर 'INDIA' गठबंधन के भीतर अपना एक अलग 'जिंजर ग्रुप' (Ginger Group) बनाने की कोशिश की थी। लेकिन आज समय का चक्र ऐसा घूमा है कि खुद को बचाने के लिए उन्हें हर दिन कांग्रेस के दरवाजे पर हाजिरी लगानी पड़ रही है।
क्या कांग्रेस में समा जाएगी तृणमूल? उठ रहे हैं बड़े सवाल
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों और देश की राजधानी के सत्ता के गलियारों से जो सबसे चौंकाने वाली खबर छनकर आ रही है, वह बेहद सनसनीखेज है:
TMC के विलय की अटकलें: चर्चा है कि ममता बनर्जी अपनी पूरी पार्टी (टीएमसी) का कांग्रेस में विलय (Merger) कर सकती हैं। इस मुद्दे पर दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत भी शुरू हो चुकी है।
ममता और अभिषेक को पद का ऑफर: सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस आलाकमान की तरफ से ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा और सम्मानजनक पद देने और अभिषेक बनर्जी को पार्टी के भीतर मध्यम स्तर का कोई महत्वपूर्ण पद सौंपने का प्रस्ताव (Proposal) दिया गया है।
सिंबल (चुनाव चिन्ह) खोने का डर: टीएमसी के भीतर जिस रफ्तार से सांसदों और विधायकों ने बगावत की है, उसे देखते हुए यह अंदेशा जताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में कानूनी लड़ाई के चलते ममता-अभिषेक के हाथ से पार्टी का नाम और 'जोड़ाफूल' चुनाव चिन्ह भी छिन सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो उनके पास कांग्रेस के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा।
फिलहाल राहुल और अभिषेक की इस डेढ़ घंटे की मुलाकात ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की राजनीति में पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ा खेल चल रहा है, जिसका आधिकारिक ऐलान कभी भी हो सकता है।