नई दिल्ली. दिल्ली के 7 लोक कल्याण मार्ग पर हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात महज औपचारिक नहीं थी। इस उच्चस्तरीय बैठक में 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति के साथ-साथ तुरंत होने वाले राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों पर विस्तृत चर्चा हुई। 2024 के लोकसभा नतीजों के बाद केंद्रीय नेतृत्व यूपी को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। बैठक में यह साफ हुआ कि दिल्ली से लखनऊ तक पूरी समन्वय के साथ रणनीति आगे बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया। इस मुलाकात ने 2027 के महासमर की पहली बड़ी चाल तय कर दी है।
बीजेपी में एकजुटता का संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ भी बैठकें हुई हैं। इन बैठकों से पार्टी के भीतर किसी भी तरह के आंतरिक मतभेद को बर्दाश्त नहीं करने का संदेश साफ है। बीजेपी एक टीम, एक एजेंडा और एक लक्ष्य के साथ लखनऊ पर भगवा परचम फहराने की तैयारी में जुट गई है। 2024 के बाद पार्टी ने यूपी में अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। अब मुख्य ध्यान आंतरिक मतभेद खत्म कर एकजुट होकर मैदान में उतरने पर है। पार्टी संगठन और सरकार दोनों मिलकर 2027 की जंग को निर्णायक बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकने जा रहे हैं। शीर्ष नेतृत्व की इन बैठकों ने साफ कर दिया है कि बीजेपी टीम की तरह लड़ने को तैयार है।
राज्यसभा चुनाव पहला बड़ा टेस्ट
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में नंबर गेम का पहला बड़ा परीक्षण 16-10-2026 को होने वाला राज्यसभा चुनाव है। खाली हो रही 10 सीटों में से 8 सीटें भारतीय जनता पार्टी, 1 समाजवादी पार्टी और 1 बहुजन समाज पार्टी के पास हैं। चुनाव अधिसूचना 29-09-2026 को जारी होगी, नामांकन की अंतिम तिथि 06-10-2026 और नामांकन वापसी 09-10-2026 को है। बीजेपी के पास संख्याबल के हिसाब से 7 से 8 सीटें सुनिश्चित हैं लेकिन 10वीं सीट पर क्रॉस वोटिंग रोकने की ठोस रणनीति बनाई गई है। इस चुनाव में शत-प्रतिशत सफलता हासिल कर बीजेपी विपक्ष के नैरेटिव को तोड़ना चाहती है।
विधान परिषद चुनाव भी अहम
राज्यसभा चुनाव के ठीक बाद 11 विधान परिषद यानी एमएलसी सीटों का चुनाव भी होना है। इनमें से 8 सीटें बीजेपी और 3 समाजवादी पार्टी के पास हैं। चुनाव आयोग ने इन क्षेत्रों में आचार संहिता लागू कर दी है। स्नातक और शिक्षक कोटे की ये सीटें पढ़े-लिखे युवाओं, शिक्षकों और मध्यम वर्ग का मूड तय करेंगी। बीजेपी ने पहले ही अपने प्रत्याशियों के नामों पर काम तेज कर दिया है। इन चुनावों में सफलता 2027 से पहले पार्टी के प्रभाव को साबित करने की बड़ी कसौटी बनेगी। दोनों चुनावों में अच्छा प्रदर्शन कर बीजेपी विपक्ष का मनोबल तोड़ना चाहती है।
अखिलेश का पीडीए रथ और कांग्रेस से टकराव
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपने पीडीए रथ को हरी झंडी दिखा दी है। उनका मानना है कि 27000 वोट प्रति सीट का फॉर्मूला कामयाब रहा तो बाजी पलट सकती है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग और सियासी महत्वाकांक्षा के पेंच में रथ का पहिया फंसने का डर है। सपा सांसद इकरा हसन कहती हैं कि बीजेपी को हराने वाला अकेला व्यक्ति अखिलेश यादव हैं जबकि कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का रुख अलग है। दोनों दलों के नेताओं के बयानों से साफ है कि गठबंधन को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है। विपक्षी वोटों का बिखराव रुके बिना अखिलेश का गणित काम नहीं कर सकता।
मायावती और ओवैसी की अलग तैयारी
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती 2007 वाले फॉर्मूले को दोहराना चाहती हैं जिसने उन्हें पूर्ण बहुमत दिलाया था। बसपा सर्वजन हिताय के एजेंडे के साथ दलित-वंचित वर्ग को एकजुट रखने की कोशिश में है। आकाश आनंद की युवा केंद्रित मुहिम और सतीश चंद्र मिश्रा के जरिए ब्राह्मण समाज को पाले में लाने की कोशिश चल रही है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यूपी में तीसरा या चौथा कोण बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। कुल मिलाकर 2027 से पहले राज्यसभा और एमएलसी चुनाव में बीजेपी अपने विरोधियों को चुनौती देने की तैयारी में है जबकि विपक्ष को लगातार हारों से सीख लेकर बाजी पलटने का सबूत देना होगा।