नई दिल्ली. यूपीएससी के 100 साल पूरे होने के खास मौके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्व की बात बताया। उन्होंने कहा कि एक सदी से इसने प्रशासन और लोगों की सेवा में अहम भूमिका निभाई है। बीते दशकों में यूपीएससी ने अपने दायित्वों को बेहतरीन तरीके से निभाया है। इतिहास से आगे बढ़कर अब हमारे सामने भारत का भविष्य इंतजार कर रहा है। 21वीं सदी का एक क्वाटर यानी 25 साल बीत चुके हैं। आने वाले 20-25 साल भारत के लिए भारत के हर व्यक्ति और संख्या के लिए बहुत अहम हैं। इस संस्थान की भूमिका राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण रही है।
सरदार पटेल की भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार बल्लभ भाई पटेल के सामने आजादी के बाद देश को एकजुट करने के साथ ही एक राष्ट्र को चलाने की चुनौती भी थी। जिस प्रेम की जरूरत राष्ट्र निर्माण के लिए थी वह सरदार पटेल ने दिया। उन्होंने इस संस्था को आजाद भारत का एक प्रमुख स्तंभ बनाया और इसे सशक्त किया। सरदार पटेल की दूरदर्शिता ने यूपीएससी को मजबूत नींव प्रदान की। आजाद भारत में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने में इस संस्थान का योगदान अमूल्य है। पटेल की सोच ने संस्था को राष्ट्र के हित में काम करने की दिशा दी।
बदलती प्राथमिकताएं
1926 में जब इसकी नींव रखी गई थी तब इसकी प्राथमिकताएं अलग थीं। तब इसकी जवाबदेही ब्रिटिश सरकार के लिए थी। लेकिन आजाद भारत में ये प्राथमिकताएं बदल गईं। अब यह संस्था देश और नागरिकों की सेवा के लिए समर्पित है। आजादी के बाद इसकी भूमिका राष्ट्र निर्माण और सुशासन सुनिश्चित करने की हो गई। प्राथमिकताओं में आए बदलाव ने इसे लोकतांत्रिक भारत की जरूरतों के अनुरूप बना दिया। आज यह संस्थान मेरिट और निष्पक्षता का प्रतीक माना जाता है।
विकसित भारत के लिए गवर्नेंस
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए जिस तरह की गवर्नेंस देश के लिए चाहिए उसका बड़ा माध्यम यूपीएससी और राज्यों का चयन आयोग भी हैं। आज जिन लोगों की भर्ती हो रही है वे विकसित भारत में अहम भूमिका निभाएंगे। 21वीं सदी के बाकी वर्षों में भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में इन अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सुशासन और कुशल प्रशासन विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित होंगे। चयन प्रक्रिया को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालना जरूरी है।
दो महत्वपूर्ण कसौटियां
पीएम मोदी ने कहा कि हमें दो कसौटियों को हमेशा याद रखना है। पहली नेशन फर्स्ट और दूसरी कसौटी है सिटीजन फर्स्ट। यही दो कसौटियां हैं जिन पर हर सलेक्शन को कसा जाना है। जब इस भाव से कैंडिडेट को परखा जाएगा तो राष्ट्र रक्षा की प्राप्ति उतनी ही सहज और आसान हो जाएगी। राष्ट्र हित और नागरिक हित को प्राथमिकता देने वाले अधिकारी ही सही मायनों में सेवा भाव से काम कर सकते हैं। इन कसौटियों पर खरा उतरने वाले उम्मीदवार देश की प्रगति में योगदान देंगे।
भविष्य की चुनौतियां
2024 का भारत आज के मुकाबले और ज्यादा अर्बन होगा। गांव और शहरों के बीच फासला कम हो जाएगा। आने वाले वर्षों में प्रशासनिक चुनौतियां भी बदलेंगी। यूपीएससी को इन बदलावों के अनुरूप उम्मीदवारों का चयन करना होगा। नेशन फर्स्ट और सिटीजन फर्स्ट की भावना से लैस अधिकारी ही भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। शताब्दी समारोह के इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने संस्थान की उपलब्धियों को सराहा और भविष्य की जिम्मेदारियों की याद दिलाई। यूपीएससी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।