पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। उत्तर बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोरखा समुदाय को साधते हुए बड़ा वादा किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार बनने पर जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हट गए हैं, उन्हें फिर से जोड़ा जाएगा। साथ ही गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों के समाधान का भरोसा भी दिया।
शाह का वादा और गोरखा कार्ड:
अमित शाह ने अपने भाषण में कहा कि गोरखाओं की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का हल केवल बीजेपी ही निकाल सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि सत्ता में आने के बाद गोरखा समाज को संतुष्ट करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और कथित तौर पर हटाए गए नामों को दोबारा सूची में शामिल किया जाएगा।
TMC का पलटवार:
बीजेपी के इस वादे पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि वोटर लिस्ट क्या किसी पार्टी की संपत्ति है? उन्होंने कहा कि किसी भी वैध नागरिक का नाम सूची से हटना ही नहीं चाहिए और इसे लेकर राजनीति करना जनता के साथ अन्याय है।
ममता-सरकार का जिक्र:
कुणाल घोष ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी लगातार कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर काम कर रहे हैं ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से बाहर न रहे।
सियासी तापमान हाई:
इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत हैं। बीजेपी जहां इसे सुधार का वादा बता रही है, वहीं TMC इसे वोटरों को भ्रमित करने की रणनीति बता रही है। चुनाव नजदीक आते ही ऐसे बयान बंगाल की राजनीति को और गरमा सकते हैं।