Jaipur: बीजेपी आज से फिर राजस्थान में जनसुनवाई (Rajasthan News) कार्यक्रम शुरू कर रही है। इस कार्यक्रम को वसुंधरा राजे सरकार के दूसरे कार्यकाल में शुरू किया गया था। इस बार यह जनसुनवाई मंत्रियों के बिना ही शुरू होने जा रही है। पार्टी पदाधिकारी हर हफ्ते भाजपा कार्यालय पर सोमवार से शुक्रवार दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक जनता की समस्याओं को सुनकर सरकार के स्तर पर उन्हें हल कराने का प्रयास करेंगे।
बीजेपी कार्यालय में होगी जनसुनवाई
दरअसल, राजस्थान में बीजेपी की सरकार बनने के बाद प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी और सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा था कि जल्द ही सरकार के मंत्री बीजेपी कार्यालय में जनसुनवाई करेंगे। अब केवल पार्टी पदाधिकारी स्तर पर ही जनसुनवाई शुरू होने से कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इसे लेकर महामंत्री जितेंद्र गोठवाल का कहना है कि सत्ता व संगठन में तालमेल की कोई कमी नहीं है। लोकसभा चुनाव सम्पन्न हुए हैं। ऐसे में मंत्री अभी अपने क्षेत्रों में हैं। हम जल्द ही मंत्रियों वाला रोस्टर भी लागू कर देंगे।
प्रदेश महामंत्री जितेन्द्र गोठवाल करेंगे जनसुनवाई
बीजेपी में आज से शुरू होने वाली जनसुनवाई में पहले दिन प्रदेश महामंत्री जितेंद्र गोठवाल मौजूद रहेंगे। वे बीजेपी कार्यालय आने वाले कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों की समस्याओं को सुनेंगे। वहीं संबंधित विभाग और सरकार के स्तर पर उन समस्याओं को हल कराने का प्रयास करेंगे। उनके साथ अन्य पार्टी पदाधिकारी भी उनके सहयोग के लिए मौजूद रहेंगे। राजस्थान बीजेपी में श्रवण बगड़ी, जितेंद्र गोठवाल और दामोदर अग्रवाल तीन महामंत्री हैं। दामोदर अग्रवाल इन लोकसभा चुनावों में भीलवाड़ा से सांसद निर्वाचित हुए हैं। वहीं, श्रवण बगड़ी के पास अन्य दायित्व हैं। ऐसे में प्रदेश महामंत्री जितेंद्र गोठवाल को जनसुनवाई की जिम्मेदारी दी गई हैं।
क्या मंत्री स्तर पर संगठन को नहीं मिल रहा समय
बिना मंत्री के जनसुनवाई कार्यक्रम घोषित होने पर अब राजनीतिक हल्कों में इसकी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनावों में खराब परफोर्मेंस के बाद केन्द्रीय नेतृत्व ने प्रदेश नेतृत्व को जनता से सीधे जुड़कर उनकी समस्याओं को हल करने के निर्देश दिए हैं। इस कारण आनन-फानन में पार्टी ने जनसुनवाई कार्यक्रम घोषित कर दिया, लेकिन मंत्रियों ने अपने तय शेडूल्य के चलते संगठन को समय नहीं दिया। ऐसे में संगठन ने अपने स्तर पर ही जनसुनवाई करने का निर्णय लिया है। इसे लेकर पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि अभी मंत्रियों को सीएम ने ही अपने क्षेत्र में जाकर जनसुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में अधिकतर मंत्री जयपुर में नहीं हैं, लेकिन अगले सप्ताह तक मंत्री जनसुनवाई में शामिल होंगे।
पहले रोज दो मंत्री करते थे जनसुनवाई
तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के दूसरे कार्यकाल (Rajasthan News) में यह जनसुनवाई कार्यक्रम शुरू हुआ था। उस समय सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन दो अलग-अलग मंत्री बीजेपी कार्यालय में जनसुनवाई करते थे। वहीं, एक पार्टी पदाधिकारी उनके साथ मौजूद रहता था। इससे जो व्यक्ति समस्या लेकर पहुंचते थे, उनकी समस्याओं का त्वरित निस्तारण हो पाता था। कई बार मंत्री मौके से ही अधिकारियों को फोन करके समस्या को हल के निर्देश दे दिया करते थे, लेकिन अब जब जनसुनवाई में मंत्री ही मौजूद नहीं रहेंगे तो लोगों की रुचि भी इसमें कम ही देखने को मिलेगी।
इनके यहां सत्ता और संगठन में क्या तालमेल होगा
बीजेपी में मंत्रियों के जनसुनवाई में शामिल नहीं होने को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा- इनके यहां सत्ता और संगठन में क्या तालमेल होगा। इनके यहां तो आरएसएस और बीजेपी में ही तालमेल नहीं है। ये लोग हवा में थे, लोकसभा चुनाव में जनता ने इन्हें जमीन पर ला दिया हैं। आगे-आगे देखिए होता हैं क्या। ये जनसुनवाई से जनता को क्या राहत देंगे। पिछले 6 महीने में इन्होंने कांग्रेस सरकार के कामों को कोसने और बदलने के अलावा कोई काम नहीं किया। आने वाले विधानसभा सत्र में जनता के मुद्दों पर इन्हें सदन में घेरने का काम कांग्रेस करेगी।