दरअसल इस कार्यक्रम में गहलोत खेमे में के कई नेताओं के पहुंचने से इसे बदले हुए सियासी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। बता दें कि आठ में से पांच सांसद पायलट खेमे के जीतकर आए हैं। राजस्थान कांग्रेस की सियासत में अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमों के बीच शुरू से खींचतान चलती रही है। आगे भी इन खेमों की सियासत ही नरेटिव तय करेगी। इसके अलावा गहलोते खेमे में रहे परसराम मोरदिया भी इस कार्यक्रम में थे।
सचिन पायलट खेमे को हरीश चौधरी का भी साथ मिला है। दोनों के साथ आने से नए सियासी समीकरण भी बन रहे हैं। दरअसल, हरीश चौधरी और अशोक गहलोत के बीच सरकार के वक्त से ही खींचतान थी। हरीश चौधरी ने कई मुद्दों पर गहलोत के खिलाफ बयान दिए। अब भी कई मुद्दों पर मतभेद हैं। हरीश चौधरी और सचिन पायलट के बीच काफी समय से नजदीकियां बढ़ने लगी हैं। इन दोनों नेताओं के गठजोड़ से नए समीकरण बना रहे हैं। हरीश चौधरी ने हनुमान बेनीवाल की पार्टी से गठजोड़ का विरोध किया था। इसके बाद बाड़मेर में उम्मेदाराम बेनीवाल को RLP से कांग्रेस में शामिल करवा लिया था। दौसा के जीरोता में राजेश पायलट के स्मृति स्मारक पर बैठे सचिन पायलट और अन्य नेता।
बता दें कि कार्यक्रम के बाद पायलट ने मीडिया से बातचीत की। पूर्वी राजस्थान में कांग्रेस की वापसी के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो भी लोग चुनाव जीते हैं, वह पार्टी के सिंबल पर जीतकर आए हैं। पार्टी ने उन्हें मौका दिया था। चुनाव में जीत का श्रेय नेताओं के साथ विशेष तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को जाता है। यदि कार्यकर्ता बूथ पर मेहनत नहीं करते तो हमें सफलता नहीं मिलती। सबके सहयोग और सामूहिक नेतृत्व की मेहनत से ही जीते हैं। जहां हम चुनाव हारे हैं, वहां अगली बार ज्यादा मेहनत करेंगे। नीट रिजल्ट के सवाल पर पायलट ने कहा- कई प्रकार के आरोप लग रहे हैं। सरकार ने जो स्पष्टीकरण दिया है, वह बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है। अपने बच्चों के भविष्य को लेकर लाखों परिवार चिंतित हैं। सरकार को बिल्कुल भी चिंता नहीं है।
लोकसभा चुनाव में राजस्थान के परिणाम को लेकर पायलट (Rajesh Pilot) ने कहा कि बहुत सारे एग्जिट पोल और कई तरह की बातों से अलग अप्रत्याशित परिणाम आए हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में डबल इंजन की सरकार को किसानों और नौजवानों ने स्पष्ट संदेश दिया है। अभी गठजोड़ की सरकार बनी है। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। चुनाव के परिणाम से राजनीतिक संदेश आया है कि दमन, प्रतिशोध, आक्रमण और भेदभाव की राजनीति नहीं चलेगी। पूर्व में संसद में जिस तरह 147 सांसदों को एक साथ निलंबित किया गया। मैं समझता हूं, इस तरह की कार्रवाई को लोगों ने पसंद नहीं किया।
नई सरकार के गठन पर पायलट बोले कि सरकार का गठन कल-परसों में ही हुआ है, लेकिन अभी से कई दलों में आशंका पैदा हुई है। कोई शपथ लेने से मना कर रहा है, ऐसे में खींचतान शुरू हो गई है। अब समय बताएगा कि सरकार कितनी चलती है और कितना कामयाब होती है। कांग्रेस में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और हम सबने मिलकर जो मेहनत की है उसका परिणाम आया है कि आज कांग्रेस के 100 सांसद है। कांग्रेस पार्टी के लिए लोकसभा के परिणाम कुछ हद तक संतोषजनक है।
इस दौरान मणिपुर हिंसा को लेकर भी पायलट से सवाल किया गया जिस पर उन्होंने कहा कि सरकार को बहुत पहले सचेत होना चाहिए था। किसी भी राजनेता, दल या सरकार को विनम्रता का परिचय देना चाहिए और जनता के अरमानों को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। 10 साल से घमंड और अहंकार की सरकार थी। जनता ने आदेश दिया है कि घमंड को त्याग कर समर्पण भाव से काम करने की जरूरत है।