सोनम कपूर का मानना है कि समय के साथ होली की पवित्रता में कमी आई है और इसी कारण वे वर्षों से इसे नहीं मना रही हैं। उनके अनुसार त्योहार तभी सार्थक है जब किसी की गरिमा आहत न हो। अपने बचपन की होली को याद करते हुए वे बताती हैं कि उन्हें सूखे गुलाल और कृत्रिम वर्षा में नृत्य करना बेहद पसंद था। वे लोगों से आग्रह करती हैं कि प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, पानी की अनावश्यक बर्बादी से बचें और आँखों की विशेष सुरक्षा रखें। उनका संदेश है कि होली परिवार और करीबी मित्रों के बीच मर्यादा के साथ मनाए जाने पर ही अपना वास्तविक आनंद देती है।
हॉस्टल की मस्ती, धमाल और हुड़दंग का त्योहार
सुशांत सिंह राजपूत दिल्ली में बिताई गई अपनी होली को जीवन की सबसे रोमांचक यादों में गिनते थे। उनका कहना था कि फ़िल्मी दुनिया में आने के बाद इस त्योहार का उत्साह अलग ही हो गया, क्योंकि पूरे वर्ष सुंदर दिखने का दबाव रहता है, लेकिन होली के दिन कोई आपको पहचान ही नहीं पाता। कॉलेज के दिनों में वे और उनके दोस्त अंडे, ग्रीस और कीचड़ से भरी मस्ती करते, ढोलक बजाते और पूरे हॉस्टल में धूम मचाते थे। मुंबई में उन्होंने कई फ़िल्मी होली पार्टियों में शिरकत की, पर उनके दिल के सबसे करीब हमेशा दिल्ली की वही धमाल से भरी होली रही।
आरके स्टूडियो की दंतकथाओं में दर्ज होली
रणबीर कपूर बताते हैं कि उनके परिवार की प्रसिद्ध ‘आरके’ होली आज भी सिनेमा जगत में मिसाल मानी जाती है। उनके दादाजी के समय में पूरा फ़िल्म उद्योग इस आयोजन का हिस्सा बनता था। दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जीतेंद्र और देवानंद जैसे दिग्गज कलाकार इस उत्सव में शामिल होते थे। आरके स्टूडियो में बने रंगों के बड़े तालाब में सभी को डुबोया जाता था, हालांकि महिलाओं को इससे सुरक्षित रखा जाता था। संगीत, नृत्य और पकवानों से सजी यह होली रणबीर की सबसे प्यारी यादों में है। वे चाहते हैं कि एक बार फिर पूरा फ़िल्म जगत उसी आत्मीयता के साथ यह त्योहार मनाए।
बचपन की दोहरी मस्ती से भरी होली
विद्या बालन के लिए बचपन की होली सबसे यादगार है। चैम्बूर में उनके बचपन के दिनों में सुबह पाँच बजे ही रंगों का उत्सव शुरू हो जाता था। बच्चे रंग–भरे गुब्बारों के साथ खूब मस्ती करते और फिर दोपहर बाद उत्तर भारतीय परिवारों की होली में शामिल होते, जिससे उनका पूरा दिन उल्लास, संगीत और रंगों में डूबा रहता था। वे आज भी उस भोली–भाली मस्ती को बड़े स्नेह से याद करती हैं।
रंगों से डरने वाले बच्चे का होली से विशेष रिश्ता
आमिर ख़ान बताते हैं कि उनका जन्म ही होली के दिन हुआ था, इसलिए यह पर्व उनके लिए विशेष महत्व रखता है। रोचक बात यह है कि बचपन में उन्हें रंगों से बहुत डर लगता था और वे अपने कमरे में छिप जाते थे। बड़े होने पर उन्होंने अपने परिवार के साथ हल्की-फुल्की होली खेलना शुरू किया। उनकी पहली फ़िल्म का नाम भी ‘होली’ था, जो इस त्योहार से उनके गहरे संबंध को दर्शाता है। उनके अनुसार यह दिन विश्राम, खुशी और अपने प्रियजनों के साथ बिताए गए शांत समय का प्रतीक है।
जब पेंट से खेली गई पहली होली
कैटरीना कैफ़ अपनी पहली होली को कभी नहीं भूल पातीं। भारत आने के बाद भी वे वर्षों तक यह त्योहार नहीं मना पाईं, लेकिन जिस दिन उन्होंने पहली बार खेली, उसी दिन उनके घर में पेंटिंग का काम चल रहा था। दोस्तों ने मज़ाक में पेंट ही उठा लिया और सब एक-दूसरे को रंग देते रहे। बाद में उन्होंने महसूस किया कि यह रंग त्वचा के लिए हानिकारक हो सकता था, लेकिन उस समय की मस्ती में किसी को इसका ध्यान नहीं रहा। आज वे सलाह देती हैं कि हमेशा सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों से ही होली खेलें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
होली की असली सीख: रंगों के साथ सम्मान और मर्यादा
इन सभी सितारों की कहानियाँ एक ही संदेश पर आकर जुड़ती हैं—होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, मर्यादा, प्रेम और एकजुटता का पर्व है। हर कलाकार चाहता है कि यह त्योहार उत्साह के साथ मनाया जाए, लेकिन इस प्रकार कि किसी की गरिमा, सुरक्षा या स्वास्थ्य को क्षति न पहुँचे। प्राकृतिक रंगों का प्रयोग, संयमित व्यवहार और परिवार के साथ बिताया गया समय ही होली की सच्ची सुंदरता को उभारता है।
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