भोपाल. मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों को अब नई गति मिल गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ लगातार बैठकों के बाद यह माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल पुनर्गठन का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह में इस दिशा में बड़ा फैसला सामने आ सकता है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद गठित सरकार में यह पहला बड़ा बदलाव होगा, इसलिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।
कई मंत्रियों की कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा
सूत्रों के मुताबिक इस संभावित फेरबदल में पांच से छह मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। प्रदर्शन, विभागीय कार्यों की समीक्षा और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा, उन्हें संगठन या अन्य जिम्मेदारियों में भेजा जा सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की संख्या 31 है, जबकि चार पद अभी भी रिक्त हैं, जिन्हें भरने की तैयारी की जा रही है।
वरिष्ठ नेताओं की भूमिका में भी हो सकता है बदलाव
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्री नई जिम्मेदारियों की ओर बढ़ सकते हैं। वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजे जाने की अटकलें लगातार चर्चा में हैं। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को संगठन या केंद्र स्तर पर कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह केवल मंत्रिमंडल विस्तार नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में व्यापक पुनर्संतुलन का संकेत माना जाएगा।
विवादों और प्रदर्शन का असर भी पड़ सकता है भारी
मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच कुछ मंत्रियों के नाम विशेष रूप से सुर्खियों में हैं। जनजातीय कार्य विभाग से जुड़े मंत्री विजय शाह को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवादों के कारण लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसके अलावा विभागीय समीक्षा और प्रशासनिक प्रदर्शन के आधार पर कुछ राज्य मंत्रियों के कामकाज का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार संगठन केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता को भी प्राथमिकता दे सकता है।
नए चेहरों को मिल सकता है मौका
संभावित विस्तार में सात से आठ नए विधायकों को मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने की चर्चा है। सागर क्षेत्र से शैलेंद्र जैन और प्रदीप लारिया के नामों पर राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है। बुंदेलखंड क्षेत्र से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह भी संभावित दावेदारों में बताए जा रहे हैं। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों का चयन किया जा सकता है, जिससे सरकार को राजनीतिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सिंधिया समर्थक खेमे की बढ़ सकती है हिस्सेदारी
राजनीतिक समीकरणों में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक समूह की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की मंत्रिमंडल में वापसी की संभावना काफी मजबूत बताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह सिंधिया समर्थक नेताओं के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाएगी। माना जा रहा है कि आगामी फेरबदल में क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक समूहों को भी प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई जा सकती है।
केवल चेहरे नहीं, विभाग भी बदल सकते हैं
मंत्रिमंडल विस्तार की सबसे महत्वपूर्ण बात यह मानी जा रही है कि इस बार केवल नए मंत्रियों की नियुक्ति ही नहीं होगी, बल्कि मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी व्यापक फेरबदल किया जा सकता है। सरकार प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने की दिशा में बड़े कदम उठा सकती है। ऐसे में जून का अंतिम सप्ताह मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जहां सत्ता के गलियारों में कई नए समीकरण जन्म लेते दिखाई दे सकते हैं।