देश-विदेश में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र संत बाबा नीम करौरी के जीवन पर आधारित फिल्म हनुमान अंश की सफलता का प्रभाव अब उनकी जन्मस्थली पर साफ दिखाई दे रहा है। जिले के अकबरपुर गांव स्थित बाबा के पैतृक आवास और मंदिर में दर्शन करने के लिए देशभर से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। पिछले एक महीने में यहां आने वाले भक्तों की संख्या में 15 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पहले रोजाना औसतन 50 से 100 श्रद्धालु ही पहुंचते थे लेकिन अब यह संख्या 1500 से ऊपर पहुंच गई है। फिल्म देखने के बाद कई लोग बाबा की जन्मस्थली देखने की तीव्र इच्छा लेकर यहां पहुंच रहे हैं।
प्रसिद्ध हस्तियों की आस्था का केंद्र
बाबा नीम करौरी के देश-विदेश में लाखों भक्त हैं। इनमें एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स जैसे नाम शामिल हैं। उनकी लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैली हुई है। फिल्म हनुमान अंश ने इस आस्था को और व्यापक बना दिया है। कई श्रद्धालु अब पहली बार अकबरपुर पहुंचकर बाबा के पैतृक स्थान के दर्शन कर रहे हैं। महांत पंडित अवधेश शर्मा के अनुसार फिल्म के बाद भक्तों का प्रवाह लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग निजी वाहनों से गूगल मैप की मदद से यहां तक पहुंच रहे हैं।
अकबरपुर को धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने के प्रयास
बाबा नीम करौरी का जन्म वर्ष 1900 में अकबरपुर गांव में हुआ था। यहां उनका पैतृक घर और मंदिर स्थित है। प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से अकबरपुर को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। करोड़ों रुपये की लागत से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। फिल्म की सफलता के बाद यहां धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं और बढ़ गई हैं। वृंदावन स्थित बाबा के आश्रम और समाधि स्थल पर भी श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि देखने को मिल रही है। सरकार गांव में पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने के लिए पहले से काम कर रही है ताकि आने वाले भक्तों को बेहतर सुविधा मिल सके।
जन्मस्थली की खास परंपराएं
बाबा नीम करौरी की जन्मस्थली पर मंदिर के अलावा उनका पैतृक आवास और डाक बंगलिया भी सुरक्षित रखा गया है। कई वर्षों तक निर्विरोध ग्राम प्रधान रहे बाबा इसी डाक बंगलिया में बैठकर पंचायत करते थे। दोनों स्थानों को सहेजकर रखा गया है। यहां की एक विशेष परंपरा यह है कि बाबा को प्रतिदिन सुबह 7 बजे और दोपहर 3 बजे चाय का भोग लगता है जिसे चाय प्रसादी कहा जाता है। यह परंपरा आज भी निरंतर जारी है। श्रद्धालु इस खास भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और बाबा की सादगी भरी जीवनशैली से प्रभावित होते हैं।
श्रद्धालुओं के अनुभव और बढ़ती लालसा
सोमवार को जयपुर से आए चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि फिल्म देखने के बाद उन्हें पता चला कि बाबा का जन्म अकबरपुर में हुआ था। इससे पहले वे सिर्फ कैंची धाम का नाम सुनते थे। यहां आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि फिल्म ने उनके मन में बाबा की जन्मस्थली देखने की तीव्र इच्छा जगा दी है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंच रहे हैं। भविष्य में यहां धार्मिक पर्यटन और विकसित होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। बाबा की जन्मस्थली अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान बनती जा रही है।