प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में सरकारी योजना की राशि का गलत तरीके से लाभ लेने वाले लाखों अपात्र लाभार्थियों का पता चला है। इस पूरे मामले में 60 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि के गबन की बात सामने आई है। कृषि विभाग की तहरीर पर स्थानीय साइबर थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। अब पुलिस और प्रशासन की ओर से पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।
60 करोड़ से ज्यादा की सरकारी राशि के गबन का आरोप
प्रतापगढ़ में किसान सम्मान निधि योजना के तहत सरकारी धन के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अपात्र लोगों ने फर्जी तरीके से योजना का लाभ उठाकर सरकारी खजाने से 60 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हासिल की। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम लाभार्थी सूची में शामिल किए गए, जो योजना के नियमों के तहत पात्र नहीं थे। कृषि विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जीवाड़े की शुरुआत कहां से हुई। साथ ही इस पूरे खेल में कौन-कौन लोग शामिल थे, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
3.18 लाख अपात्र लाभार्थियों की सूची तैयार
जांच के दौरान कृषि विभाग ने 3.18 लाख अपात्र लाभार्थियों की विस्तृत सूची तैयार कर पुलिस प्रशासन को सौंप दी है। इस सूची में ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर नियमों के विपरीत किसान सम्मान निधि का लाभ लिया। प्रशासन अब इन लाभार्थियों के दस्तावेजों और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी की जांच करेगा। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि रकम किन खातों में भेजी गई और किस तरीके से निकाली गई। सूची सामने आने के बाद अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई है। इतने बड़े स्तर पर अपात्र लाभार्थियों का सामने आना पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाता है। अब एक-एक लाभार्थी की पहचान और पात्रता का सत्यापन किया जाएगा।
कुंडा तहसील में सबसे ज्यादा अपात्र लाभार्थी
जांच में यह भी सामने आया है कि अपात्र लाभार्थियों की संख्या कुंडा तहसील में सबसे ज्यादा बताई जा रही है। अधिकारियों की ओर से इस क्षेत्र के लाभार्थियों के रिकॉर्ड की विशेष जांच की जा रही है। इसके अलावा सूची में शामिल कुल अपात्र लाभार्थियों में करीब 60 प्रतिशत लोग बाहरी क्षेत्रों के निवासी पाए गए हैं। इससे यह आशंका और गहरा गई है कि योजना के रिकॉर्ड में जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज कराई गई। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि बाहरी लोगों के नाम स्थानीय लाभार्थी सूची में कैसे शामिल हुए। संबंधित दस्तावेजों और पंजीकरण प्रक्रिया की भी जांच की जाएगी। इस जांच से फर्जीवाड़े के पूरे तरीके का खुलासा होने की उम्मीद है।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए हुआ खेल?
पुलिस की जांच अब इस बात पर भी केंद्रित है कि अपात्र लोगों को किसान सम्मान निधि का लाभ दिलाने के लिए किस तरह के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। आशंका है कि फर्जी या गलत दस्तावेजों के आधार पर लाभार्थियों का पंजीकरण कराया गया। जांच एजेंसियां आवेदन प्रक्रिया से लेकर बैंक खातों में राशि पहुंचने तक की पूरी कड़ी खंगाल रही हैं। यह भी देखा जाएगा कि लाभार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था। अगर किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच हो सकती है। पुलिस मुख्य साजिशकर्ताओं और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ होगी।
अपात्रों से होगी सरकारी रकम की वसूली
प्रशासन ने गलत तरीके से किसान सम्मान निधि हासिल करने वाले लोगों से सरकारी रकम वापस लेने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों की योजना के मुताबिक चिन्हित अपात्र लाभार्थियों से अब तक मिली राशि की वसूली की जाएगी। इसके लिए लाभार्थियों की पहचान और उनके रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा। जिन लोगों ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर योजना का लाभ लिया है, उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। प्रशासन का लक्ष्य सरकारी खजाने से निकली राशि की पाई-पाई वापस लेना है। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर होने वाली इस वसूली प्रक्रिया पर शासन स्तर से भी नजर रखी जा रही है।
EOW को सौंपी जा सकती है जांच
मामले में सरकारी राशि के बड़े पैमाने पर गबन की बात सामने आने के बाद आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा यानी EOW को जांच सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। इतने बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े की जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसी की जरूरत महसूस की जा रही है। शासन और प्रशासन स्तर पर पूरे मामले की निगरानी की जा रही है। अगर जांच EOW को सौंपी जाती है तो वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल की जा सकती है। बैंक खातों में रकम के ट्रांसफर और निकासी से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे। इसके साथ ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने और लाभार्थियों का पंजीकरण कराने वालों की भूमिका सामने लाई जाएगी। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
मुख्य साजिशकर्ताओं की तलाश में पुलिस
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस अब उन लोगों की तलाश में जुट गई है, जिन्होंने कथित तौर पर इस पूरे फर्जीवाड़े की योजना तैयार की। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इतने बड़े स्तर पर अपात्र लोगों को योजना से जोड़ने के लिए किस नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। पुलिस दस्तावेजों, लाभार्थी रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सुराग जुटा रही है। साइबर थाने में मामला दर्ज होने के कारण डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों को आशंका है कि इस पूरे मामले के पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर सकता है। जांच के दौरान अगर किसी सरकारी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पुलिस की नजर उन मुख्य आरोपियों पर है, जिन्होंने कथित तौर पर सरकारी योजना की राशि में सेंध लगाने का पूरा खेल रचा।