उत्तर प्रदेश: सोनभद्र में सरकारी जमीन पर मस्जिद, मदरसे, मजार, कब्रिस्तान और ईदगाह समेत धार्मिक निर्माण से जुड़ी शिकायतों के बाद प्रशासन की जांच तेज हो गई है। रॉबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र के पनौरा समेत 16 से अधिक गांवों और कस्बों से ऐसी शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। प्रशासन और पुलिस की जांच के बाद शासन को रिपोर्ट भेजे जाने की जानकारी है। अब मामले में आगे की कार्रवाई के लिए छह सदस्यीय टीम गठित की गई है। हालांकि, सामने आए सभी मामलों में जमीन के स्वामित्व, निर्माण की अनुमति और अन्य कानूनी पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
16 से ज्यादा गांवों और कस्बों से आई शिकायतें
प्रशासन के सामने सरकारी जमीन पर धार्मिक निर्माण से जुड़ी कई शिकायतें आने की बात कही गई है। जांच के दायरे में रॉबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र के पनौरा समेत 16 से अधिक गांव और कस्बे शामिल बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग विभागों के स्वामित्व वाली जमीन पर धार्मिक निर्माण होने की जानकारी जांच के दौरान सामने आई। इनमें एनसीएल, एनटीपीसी, सिंचाई विभाग, वन विभाग और रेलवे की जमीन से जुड़े मामले बताए गए हैं। प्रशासन ने इन स्थानों पर जमीन के रिकॉर्ड और निर्माण की स्थिति की जांच की है। कुछ मामलों में निर्माण के लिए अनुमति या वैध आधार से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं। अब इन सभी मामलों में रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
खड़िया से रेनुकूट तक सामने आए कई मामले
जांच रिपोर्ट में खड़िया क्षेत्र में एनसीएल की जमीन पर जामा मस्जिद का मामला सामने आने का दावा किया गया है। चिलकाटांड़ में एनटीपीसी की जमीन पर गुलश-ए-मदीना जामा मस्जिद का निर्माण होने की जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल बताई गई है। पिपरी नगर पंचायत क्षेत्र में सिंचाई विभाग की जमीन पर मस्जिद बनाए जाने की बात कही गई है। रेनुकूट क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर जामा मस्जिद का मामला भी जांच के दायरे में बताया गया है। इसके अलावा शिवा पार्क जोकाही में रेलवे की जमीन पर मदरसा इस्लामिया से जुड़ा मामला सामने आने की बात कही गई है। प्रशासन अब संबंधित विभागों के भूमि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान करेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि किन मामलों में किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जानी है।
शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट
सरकारी जमीन से जुड़े इन मामलों की जांच के बाद जिला प्रशासन की ओर से रिपोर्ट शासन को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में अलग-अलग स्थानों पर मिले निर्माण और संबंधित जमीन के स्वामित्व का विवरण शामिल बताया गया है। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई के लिए प्रशासन ने छह सदस्यीय टीम गठित की है। इस टीम में रॉबर्ट्सगंज, ओबरा और दुद्धी के एसडीएम के नेतृत्व में अधिकारी शामिल किए गए हैं। टीम को राजस्व विभाग और पुलिस के बीच समन्वय बनाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मौके की स्थिति, राजस्व अभिलेख और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की दोबारा जांच की जा सकती है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित मामलों में नियमानुसार कदम उठाया जाएगा।
सीएम के निर्देश के बाद जांच ने पकड़ी रफ्तार
बताया गया है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सोनभद्र में सरकारी जमीन पर धार्मिक निर्माण से जुड़ी शिकायतों की जांच शुरू हुई थी। इसके बाद राजस्व और पुलिस विभाग ने अपने-अपने स्तर पर जानकारी जुटाई। अधिकारियों ने अलग-अलग स्थानों पर जमीन के रिकॉर्ड और निर्माण की स्थिति की पड़ताल की। जांच के दौरान कई स्थानों पर सरकारी विभागों की जमीन पर धार्मिक निर्माण होने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया। प्रशासन ने इन मामलों को एक रिपोर्ट के रूप में तैयार किया। यह रिपोर्ट अगस्त में जिलाधिकारी के सामने रखे जाने की बात कही गई है। इसके बाद मामला शासन तक पहुंचा और अब आगे की कार्रवाई के लिए छह सदस्यीय टीम बनाई गई है।
22 मार्च को सीएम से मुलाकात के बाद शुरू हुई प्रक्रिया
इस मामले की शुरुआत मार्च 2026 में हुई शिकायतों और प्रशासनिक निर्देशों से जुड़ी बताई जा रही है। भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने 22 मार्च को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस दौरान सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण समेत सोनभद्र से जुड़े कई मुद्दे मुख्यमंत्री के सामने रखे गए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इसके बाद 25 मार्च को तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से संबंधित तहसीलों से रिपोर्ट मांगी गई थी। एसपी को भी अपने स्तर से जांच करने के लिए पत्र भेजा गया था। राजस्व और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपे जाने की बात सामने आई है। अब प्रशासन की छह सदस्यीय टीम इस मामले में आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।
अब छह सदस्यीय टीम करेगी आगे की जांच
प्रशासन की ओर से गठित छह सदस्यीय टीम के सामने अब सबसे अहम काम जमीन के वास्तविक स्वामित्व और निर्माण की वैधता की पुष्टि करना होगा। इसके लिए राजस्व रिकॉर्ड, संबंधित विभागों के दस्तावेज और मौके की स्थिति का मिलान किया जा सकता है। पुलिस की मदद से उन स्थानों की भी जांच की जाएगी, जहां निर्माण को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। यदि किसी मामले में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जिन निर्माणों के पास वैध दस्तावेज या अनुमति होगी, उनकी स्थिति अलग होगी। इसलिए अंतिम कार्रवाई जांच और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रशासन की छह सदस्यीय टीम की रिपोर्ट पर आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी।