बागेश्वर : जिले की कपकोट विधानसभा क्षेत्र में सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मल्ला तल्ला और बिचला दानपुर क्षेत्र के ग्रामीण पिछले एक माह से फुलवाड़ी-फलाचौरा और खालीधार की करीब 8 किलोमीटर सड़क के निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। लंबे समय से आंदोलन के बावजूद सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने अब अपनी आवाज जिला मुख्यालय तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
पूर्व सैनिक रतन सिंह दानू के नेतृत्व में फुलवाड़ी-फलाचौरा और खालीधार सड़क संघर्ष समिति के बैनर तले हजारों ग्रामीणों ने बागेश्वर नगर में जन आक्रोश रैली निकाली। रैली में ग्रामीणों ने नारों और जनगीतों के माध्यम से अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। रैली जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंची जहां ग्रामीणों ने प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई।
एक माह से आंदोलन पर ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर वे पिछले एक महीने से आंदोलन कर रहे हैं लेकिन अभी तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। पहाड़ी क्षेत्र में सड़क को ग्रामीणों के लिए विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उन्होंने कहा कि सड़क सुविधा के अभाव में स्थानीय लोगों को आवागमन स्वास्थ्य शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं चाहिए बल्कि सड़क निर्माण के लिए जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहिए।
कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने दिया समर्थन
जन आक्रोश रैली में कपकोट के पूर्व भाजपा विधायक शेर सिंह गढ़िया, युवा नेता भूपेंद्र कोरंगा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी समेत विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे।
इसके अलावा बागेश्वर विधानसभा क्षेत्र से क्षेत्रीय नेता कवि जोशी और बालकृष्ण सहित उत्तराखंड क्रांति दल के नेताओं ने भी ग्रामीणों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। विभिन्न संगठनों और नेताओं की मौजूदगी से आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने का संदेश गया।
आश्वासन नहीं जमीन पर चाहिए विकास
रैली के दौरान ग्रामीणों ने सरकार से सड़क निर्माण को लेकर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की। उनका कहना है कि पहाड़ के गांवों में विकास की बात तभी सार्थक होगी जब मूलभूत सुविधाएं ग्रामीणों तक पहुंचें।
ग्रामीणों ने कहा कि सड़क सिर्फ आवागमन का साधन नहीं है बल्कि इससे गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है। सड़क के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन की समस्या भी बढ़ती है।
आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी
कपकोट के ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन केवल सड़क निर्माण की मांग तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि यदि सरकार पहाड़ के गांवों की समस्याओं और जनता की आवाज को गंभीरता से नहीं लेती है तो वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत आंदोलन को और व्यापक करेंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से जल्द से जल्द सड़क निर्माण के संबंध में सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।
शासन स्तर पर मामला होने की बात
वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि सड़क से जुड़ा मामला शासन स्तर पर विचाराधीन है। शासन से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना होगा कि एक माह से आंदोलन कर रहे ग्रामीणों की मांग पर शासन कब निर्णय लेता है और फुलवाड़ी-फलाचौरा और खालीधार की 8 किलोमीटर सड़क के निर्माण को लेकर कब ठोस पहल शुरू होती है। फिलहाल ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें आश्वासन नहीं बल्कि सड़क निर्माण की धरातलीय कार्रवाई का इंतजार है।