कोलकाता/सिलीगुड़ी: उत्तर बंगाल के पर्वतीय क्षेत्रों में जून के महीने में हुई मूसलाधार बारिश और प्राकृतिक आपदा के बाद, भारतीय सेना ने एक बार फिर अपने अदम्य साहस और कार्यकुशलता का परिचय दिया है। बालासन नदी के तेज बहाव में बहे मिरीक के ऐतिहासिक दूधिआ बेली ब्रिज (Dudhia Bailey Bridge) को सेना ने रिकॉर्ड 20 दिनों के भीतर दोबारा बनाकर खड़ा कर दिया है। बुधवार को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय 'नबान्न' से वर्चुअल माध्यम से इस पुनर्निर्मित पुल का उद्घाटन किया और इसे आम जनता के लिए खोल दिया।
इस उद्घाटन समारोह के दौरान राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल, दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट सहित पीडब्ल्यूडी (PWD) और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पुल के चालू होने से मिरीक और सिलीगुड़ी के बीच ठप पड़ा सड़क संपर्क एक बार फिर बहाल हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को बड़ी राहत मिली है।
सेना की 'युद्धस्तर' पर कार्रवाई, सीएम ने जताया आभार
जून के महीने में हुई अत्यधिक भारी बारिश के कारण बालासन नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था, जिसके तीव्र वेग ने ह्यूमपाइप के अस्थायी पुल और दूधिआ बेली ब्रिज के एक हिस्से को पूरी तरह से तबाह कर दिया था। इसके चलते राज्य राजमार्ग संख्या 12 (State Highway 12) बंद हो गया था और मिरीक का सिलीगुड़ी से संपर्क पूरी तरह कट गया था।
राज्य सरकार की अपील पर भारतीय सेना की 'त्रिशक्ति कोर' (Trishakti Corps) ने नदी का बहाव थोड़ा कम होते ही युद्धस्तर पर काम शुरू किया। महज 20 दिनों में इस कठिन कार्य को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सेना के जवानों, पीडब्ल्यूडी और स्थानीय प्रशासन की टीम को बधाई दी।
पहाड़ की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं
उद्घाटन मंच से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उत्तर बंगाल और पहाड़ी क्षेत्र के लोगों का समग्र विकास, सुरक्षा और समावेशी प्रगति वर्तमान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए उन्होंने कई बड़े प्रशासनिक फैसलों का ऐलान किया:स्थायी रेस्क्यू टीम: आगामी सितंबर महीने से पहाड़ पर आधुनिक उपकरणों से लैस 50 सदस्यीय स्थायी सिविल डिफेंस टीम (Civil Defense Team) तैनात रहेगी, जो पुलिस और सेना की मदद करेगी।
पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों की भर्ती: आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सैनिक बोर्ड के माध्यम से पूर्व सैनिकों (Ex-Army) को अनुबंध के आधार पर लिया जा रहा है। इसके साथ ही एक विशेष 'अग्निवीर' वाहिनी बनाने की योजना है, जिसकी बड़ी यूनिट दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कर्सियांग में स्थायी रूप से तैनात होगी।

'2 महीने का कार्यकाल नजीर': सांसद राजू बिष्ट ने गिनाए विकास कार्य
दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने इस त्वरित कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद मात्र दो महीने के भीतर सुवेंदु अधिकारी ने पहाड़ के स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए जो कदम उठाए हैं, वे अभूतपूर्व हैं।
सांसद राजू बिष्ट ने वर्तमान सरकार के तहत स्वीकृत परियोजनाओं का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया:
1. स्वास्थ्य क्षेत्र: कालिम्पोंग में एक नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दी गई है। दार्जिलिंग में अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर और 500 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए जमीन की तलाश शुरू हो चुकी है। इसके अलावा, कर्सियांग सब-डिवीजनल अस्पताल की क्षमता बढ़ाकर 250 बेड की जा रही है।
2. चाय श्रमिकों की सुरक्षा: पहाड़ के चाय बागान श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए ₹313 करोड़ का विशेष फंड स्वीकृत किया गया है। इसके अलावा, 'अन्नपूर्णा योजना' के तहत 1.22 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिल रहा है।
3. यातायात और सड़कें: दार्जिलिंग शहर के ट्रैफिक जाम को खत्म करने के लिए एक नए 'सर्कुलर रोड' को मंजूरी दी गई है। दार्जिलिंग के वैकल्पिक राजमार्ग का काम तेज गति से चल रहा है और रोहिणी रोड को पूरी तरह से PWD ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।