दार्जिलिंग. वर्ष 1913 में जब रबींद्रनाथ टैगोर को उनकी कृति गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था तब वे पहले गैर-यूरोपीय और भारतीय साहित्यकार बने थे जिन्होंने दुनिया को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा। उनके निधन के लगभग 85 साल बाद अब उनकी एक अन्य महत्वपूर्ण नाट्य रचना मुक्तधारा के नाम पर दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे विशेष टॉय ट्रेन चलाएगी। यह ट्रेन पहाड़ की वादियों में छुक-छुक की आवाज के साथ गुरुदेव की स्मृति को जीवंत करेगी। बंगाल की इस पहचान को पर्यटकों तक पहुंचाने का प्रयास रेलवे ने किया है। देशी-विदेशी पर्यटक अब इस खास सफर के जरिए टैगोर के साहित्यिक योगदान से एक नए अंदाज में जुड़ सकेंगे।
मुक्तधारा स्पेशल टॉय ट्रेन की खासियत
दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे अपने 145 साल के इतिहास में पहली बार किसी साहित्यिक कृति के नाम पर विशेष टॉय ट्रेन का संचालन कर रही है। इस ट्रेन का नाम मुक्तधारा स्पेशल जॉय राइड रखा गया है। यह कर्सियांग से महानदी के बीच लगभग 6 से 7 किलोमीटर लंबे नए नैरो गेज रूट पर चलेगी। रेलवे ने इस नए मार्ग पर पटरियां बिछाने में महीनों की मेहनत और पर्याप्त धनराशि खर्च की है। सप्ताह के सातों दिन पर्यटक इस जॉय राइड का आनंद ले सकेंगे। अन्य रूटों पर भी जॉय राइड की सुविधा पहले से मौजूद है लेकिन मुक्तधारा स्पेशल की अपनी अलग पहचान होगी।
नए रूट का निर्माण और तैयारी
कर्सियांग से महानदी के बीच नई नैरो गेज रेल लाइन का निर्माण दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के लिए ऐतिहासिक कदम है। इस छोटे लेकिन खूबसूरत मार्ग पर टॉय ट्रेन पहाड़ी दृश्यों के बीच से गुजरेगी। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस रूट को पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पटरियां बिछाने के बाद परीक्षण और सुरक्षा जांच पूरी कर ली गई है। 1 अक्टूबर से नियमित संचालन शुरू होने के साथ ही यह मार्ग दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में नया आकर्षण जोड़ने वाला है। स्थानीय स्तर पर भी इस नई सुविधा को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का गौरवशाली सफर
दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का अस्तित्व 4 जुलाई 1881 से शुरू हुआ था। तब से लेकर अब तक यह पहाड़ी टॉय ट्रेन दुनिया भर के पर्यटकों के दिलों की धड़कन बनी हुई है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त इस रेलवे ने अपने लंबे सफर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। पहली बार किसी साहित्यकार की कृति के नाम पर ट्रेन चलाना इसकी नई उपलब्धि है। गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर की जन्मभूमि बंगाल से जुड़ा यह प्रयास पर्यटन और संस्कृति दोनों को एक साथ बढ़ावा देने वाला साबित हो सकता है। रेलवे का यह कदम इतिहास और साहित्य को वर्तमान से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।
पर्यटकों के लिए नया आकर्षण और उम्मीदें
1 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस विशेष सफर से दार्जिलिंग क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। मुक्तधारा स्पेशल टॉय ट्रेन न केवल मनोरंजन का साधन बनेगी बल्कि गुरुदेव के साहित्यिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगी। पहाड़ी वादियों में दौड़ती यह ट्रेन टैगोर की स्मृति को जीवंत रखेगी। स्थानीय प्रशासन और रेलवे दोनों ही इस नई सुविधा को सफल बनाने के लिए तैयारियां पूरी कर चुके हैं। पर्यटक अब कर्सियांग से महानदी के बीच के खूबसूरत सफर का आनंद लेते हुए गुरुदेव की कृति से भी जुड़ सकेंगे। यह पहल बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर को और मजबूत करने वाली साबित हो सकती है।