कोलकाता: धर्मतला के डोरिना क्रॉसिंग पर छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस पर पथराव और पत्रकारों पर हमले की जांच अब तेज़ हो गई है। सोमवार को कोलकाता पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाकर पूरे घटनाक्रम का सीन रीक्रिएशन (पुनर्निर्माण) कराया। इस दौरान जांच अधिकारियों ने यह समझने की कोशिश की कि हिंसा कैसे शुरू हुई, किसने भीड़ को उकसाया और अलग-अलग आरोपियों की भूमिका क्या थी।
सलमान, अफरोज समेत पांच आरोपियों से पूछे गए कई सवाल
पुलिस जिन आरोपियों को घटनास्थल पर लेकर पहुंची, उनमें मोहम्मद अफरोज, शेख सलमान सहित पांच लोग शामिल थे। अधिकारियों ने आरोपियों से उस दिन की गतिविधियों को दोबारा बताने को कहा और यह भी पूछा कि वे किस समय किस स्थान पर मौजूद थे। पुलिस घटनास्थल पर मौजूद सीसीटीवी फुटेज, वीडियो क्लिप और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का आरोपियों के जवाबों से मिलान कर रही है, ताकि जांच को मजबूत किया जा सके।
क्या हुआ था धर्मतला में?
शुक्रवार को कथित NEET पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर विभिन्न छात्र और युवा संगठनों ने धर्मतला में विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के अंतिम चरण में स्थिति अचानक बिगड़ गई। आरोप है कि भीड़ के एक हिस्से ने पुलिसकर्मियों, ड्यूटी पर मौजूद पत्रकारों और राहगीरों पर पानी की बोतलें, जूते, डंडे और पत्थर फेंके। इस दौरान कई पुलिसकर्मी और मीडिया कर्मी घायल हुए, जबकि इलाके में काफी देर तक यातायात भी प्रभावित रहा। घटना के बाद पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है।
शेख सलमान ने खुद को बताया बेगुनाह
घटनास्थल पर लाए जाने के दौरान शेख सलमान ने मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उसने दावा किया कि वह किसी हिंसक गतिविधि में शामिल नहीं था और केवल सड़क पर पड़े कचरे को उठा रहा था। पत्रकारों पर हमले के आरोपों को भी उसने नकारते हुए कहा कि सच्चाई अदालत में सामने आएगी। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि हर आरोपी की भूमिका उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांची जा रही है।
सीसीटीवी, डिजिटल सबूत और गवाहों पर जांच का फोकस
जांच अधिकारी अब सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, सोशल मीडिया क्लिप और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एकत्र कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि घटनास्थल पर कराया गया सीन रीक्रिएशन पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने और यह तय करने में मदद करेगा कि हिंसा की साजिश कैसे रची गई और इसमें कौन-कौन शामिल था। जरूरत पड़ने पर आगे और गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।