दुर्गापुर: पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहर दुर्गापुर से एक बेहद दर्दनाक और रूह कँपा देने वाली खबर सामने आई है। दुर्गापुर स्टील प्लांट (DSP) के भीतर काम के दौरान एक ठेका मजदूर की खौलते हुए गर्म स्लैग (धातु का कचरा) से भरे कंटेनर में गिरने से मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि मृतक का शव पूरी तरह से जलकर कंकाल में तब्दील हो गया, जिसे देखकर पहचानना भी नामुमकिन था। इस घटना के बाद से कारखाने के भीतर श्रमिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और साथी कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
नाइट शिफ्ट में काम के दौरान हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक मजदूर की पहचान शेख शाहिदुल के रूप में हुई है, जो दुर्गापुर के ही आरती गांव का रहने वाला था। शाहिदुल रोज की तरह शुक्रवार को नाइट शिफ्ट में काम करने के लिए कारखाने आया था। वह दुर्गापुर स्टील प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस विभाग के 2 नंबर फर्नेस में रखरखाव (Maintenance) का काम कर रहा था। चश्मदीदों के मुताबिक, देर रात काम करने के दौरान अचानक एक लोहे की रॉड टूट गई, जिससे संतुलन बिगड़ने के कारण शाहिदुल सीधे नीचे रखे खौलते हुए गर्म स्लैग से भरे लैडल (कंटेनर) में जा गिरा।

साथी मजदूर ने बयां किया खौफनाक मंजर
देर रात जब इस घटना की भनक अन्य कर्मचारियों को लगी, तो पूरे प्लांट में हड़कंप मच गया। शाहिदुल के साथ काम करने वाले साथी मजदूर मनोज रुइदास ने बताया, "हम दोनों एक साथ ही ड्यूटी कर रहे थे। मैं कुछ देर के लिए बाहर आराम करने गया था। जब वापस लौटा तो शाहिदुल वहां नहीं था। काफी तलाश करने के बाद पता चला कि वह लैडल के भीतर गिर चुका था और उसकी मौत हो चुकी थी। आशंका है कि कोई रॉड अचानक टूट गई और वह सीधे नीचे जा गिरा।"
सुरक्षा में लापरवाही का आरोप, प्लांट के बाहर भारी प्रदर्शन
इस दर्दनाक हादसे के बाद शनिवार सुबह से ही कारखाने के बाहर तनाव का माहौल देखा जा रहा है। मृतक के परिजनों और साथी श्रमिकों ने सुरक्षा में बड़ी लापरवाही का आरोप लगाते हुए कारखाने के गेट पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं:
1. पीड़ित परिवार के एक सदस्य को तत्काल प्रभाव से अस्थाई नौकरी दी जाए।
2. परिवार को उचित और पर्याप्त आर्थिक मुआवजा मिले।
3. इस पूरे हादसे की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई हो सके।
श्रम संगठनों का कहना है कि अगर कारखाने में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम और बेल्ट की व्यवस्था होती, तो शायद शाहिदुल की जान बचाई जा सकती थी। खबर लिखे जाने तक प्रबंधन और श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर जारी है और मौके पर तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है।