पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में गंगा नदी का जलस्तर असामान्य रूप से बढ़ने के बाद नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। गंगा इस समय खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। बढ़ते जल दबाव को देखते हुए फरक्का बैराज के सभी 109 गेट खोल दिए गए हैं।
बैराज से छोड़ा जा रहा करीब 16 लाख क्यूसेक पानी
फरक्का बैराज के जनरल मैनेजर आर. डी. देशपांडे के अनुसार, बैराज के अपस्ट्रीम से डाउनस्ट्रीम की ओर तेजी से पानी छोड़ा जा रहा है। मौजूदा समय में करीब 16 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके अलावा लगभग 40 हजार क्यूसेक पानी फीडर कैनाल के माध्यम से छोड़ा जा रहा है।
खतरे के निशान से 1.5 मीटर ऊपर पहुंचा गंगा का जलस्तर
सेंट्रल वॉटर कमीशन के अनुसार, फरक्का के डाउनस्ट्रीम इलाके में गंगा का जलस्तर करीब 23.75 मीटर तक पहुंच गया है। यहां खतरे का निशान 22.25 मीटर निर्धारित है। यानी गंगा फिलहाल खतरे के निशान से करीब 1.5 मीटर ऊपर बह रही है। हालांकि अगले दो दिनों में जलस्तर में कुछ कमी आने की संभावना जताई गई है।
बेनियाग्राम समेत कई इलाकों में जलभराव का डर
स्थानीय निवासी छोटन घोष ने बताया कि गंगा का पानी तेजी से बढ़ रहा है और नदी पहले से ही खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि जलस्तर में और वृद्धि हुई तो डाउनस्ट्रीम के बेनियाग्राम समेत कई इलाकों में घरों में पानी घुस सकता है और व्यापक जलभराव की स्थिति बन सकती है।
गंगा किनारे रहने वाले परिवारों में सबसे ज्यादा दहशत
छोटन घोष के अनुसार, फरक्का के लोग बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंतित जरूर हैं, लेकिन सबसे अधिक डर गंगा किनारे रहने वाले परिवारों में है। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस बार पहले की तुलना में अधिक सतर्क और सक्रिय दिखाई दे रहा है, लेकिन नदी का बढ़ता जलस्तर लोगों की चिंता लगातार बढ़ा रहा है।
2019 का दर्द फिर हुआ ताजा, कटाव पीड़ित परिवारों में डर
साल 2019 में गंगा के कटाव में अपना सब कुछ गंवा चुके कार्तिक मंडल के लिए मौजूदा हालात पुराने जख्मों को फिर ताजा कर रहे हैं। वह पहले फरक्का के हुसैनपुर इलाके में रहते थे, लेकिन गंगा कटाव में उनका घर और संपत्ति नदी में समा गई थी। इसके बाद वह मजबूरी में फरक्का की सरकारी खास जमीन पर आकर रहने लगे।
बढ़ते पानी के साथ सरकारी जमीन खाली करने का भी संकट
कार्तिक मंडल ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ उनके सामने एक और बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। सरकारी जमीन पर रहने वाले लोगों को वहां से हटने का नोटिस भी दिया गया है। उनका कहना है कि यदि पानी और बढ़ा तो मेला मैदान और आसपास की सड़कों पर पानी पहुंच सकता है, जिससे कई गांवों के डूबने का खतरा पैदा हो सकता है।
तारानगर में फिर शुरू हुआ गंगा का कटाव
गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच बुधवार सुबह से तारानगर इलाके में एक बार फिर कटाव शुरू हो गया है। मुर्शिदाबाद जिले के लालगोला और रघुनाथगंज थाना क्षेत्रों की सीमा पर स्थित तारानगर और राधाकृष्णपुर गांव पिछले दो वर्षों से लगातार गंगा कटाव की मार झेल रहे हैं।
दो साल में कई घर और जमीन नदी में समा चुके
लगातार हो रहे कटाव के कारण पिछले दो वर्षों में इन गांवों के कई घर, जमीन और पेड़ गंगा में समा चुके हैं। अब एक बार फिर कटाव शुरू होने से सीमावर्ती गांवों के लोगों में नई दहशत फैल गई है। लोग अपने घरों और जमीन को बचाने के लिए प्रशासन से त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
अगले कुछ दिन बेहद अहम
फरक्का में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर होने और बैराज के सभी 109 गेट खुलने के बाद मुर्शिदाबाद के गंगा तटीय इलाकों में प्रशासन की चुनौती बढ़ गई है। हालांकि अगले दो दिनों में जलस्तर कम होने की संभावना जताई गई है, लेकिन बाढ़ और कटाव की आशंका को देखते हुए गंगा किनारे रहने वाले परिवारों की नजर अब नदी की स्थिति और प्रशासन की तैयारियों पर टिकी हुई है।