कोलकाता: कोलकाता के पॉश इलाके पार्क स्ट्रीट में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 11 शातिर जालसाजों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पार्क स्ट्रीट थाना क्षेत्र के मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित एक नामी होटल में ठहरा हुआ था और वहीं से पूरे देश में साइबर अपराध का ताना-बाना बुन रहा था। गिरोह के सदस्य आम लोगों को केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना और फसल कृषि बीमा के तहत वित्तीय सहायता और सब्सिडी दिलाने का झांसा देते थे। विश्वसनीय आवाज और फर्जी सरकारी दस्तावेजों का सहारा लेकर वे भोले-भाले नागरिकों को अपने जाल में फंसाते थे और उनके खातों से गाढ़ी कमाई साफ कर देते थे। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से न केवल एक बड़ा रैकेट ध्वस्त हुआ है, बल्कि करोड़ों रुपये की संभावित ठगी पर भी ब्रेक लग गया है।
झारखंड कनेक्शन और सरगना कुंदन कुमार का पर्दाफाश
पकड़े गए सभी 11 आरोपी मूल रूप से झारखंड के जामताड़ा और देवघर जिलों के रहने वाले हैं, जो देश भर में साइबर अपराध के गढ़ माने जाते हैं। जांच में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कुंदन कुमार है, जो अपने इन सभी साथियों को निर्देश दे रहा था और पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल कर रहा था। कुंदन कुमार ने ही कोलकाता में रुककर अपराध को अंजाम देने की पूरी रणनीति तैयार की थी ताकि स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को उन पर आसानी से शक न हो। ये आरोपी जामताड़ा के पुराने तरीकों को अपग्रेड करके नए डिजिटल टूल्स और कॉलिंग ऐप के जरिए लोगों को निशाना बना रहे थे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि कुंदन कुमार का नेटवर्क केवल बंगाल या झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार देश के कई अन्य राज्यों के साइबर अपराधियों से भी जुड़े हो सकते हैं।
होटल का कमरा बना था ठगी का कंट्रोल रूम
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये सभी आरोपी कोलकाता की हलचल का फायदा उठाकर सुरक्षित छिपने के इरादे से आए थे। घटना से ठीक तीन दिन पहले वे कोलकाता पहुंचे थे और मिर्जा गालिब स्ट्रीट के होटल में कमरा किराए पर लिया था। आरोपियों ने होटल के कमरे को ही अपना हाई-टेक कॉल सेंटर और कंट्रोल रूम बना रखा था। वे दिन-रात कमरे के भीतर बंद रहकर फर्जी सिम कार्ड्स और इंटरनेट कॉलिंग के माध्यम से देश भर के लोगों को कॉल और मैसेज भेजते थे। होटल स्टाफ या बाहरी किसी व्यक्ति को उन पर शक न हो, इसके लिए वे कमरे से बाहर बहुत कम निकलते थे और खाना भी अंदर ही मंगवाते थे। होटल में रुककर बिना किसी हलचल के इतने बड़े पैमाने पर कॉल सेंटर चलाना उनकी सोची-समझी योजना का हिस्सा था, जिसका पुलिस ने समय रहते पर्दाफाश कर दिया।
पुलिस की साहसिक छापेमारी और भारी बरामदगी
कोलकाता पुलिस की गुप्त शाखा (इंटेलिजेंस) और पार्क स्ट्रीट थाना पुलिस को जब होटल में संदिग्ध गतिविधियों की सटीक सूचना मिली, तो उन्होंने बिना कोई समय गंवाए एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस टीम ने पूरी योजनाबद्ध तरीके से होटल की घेराबंदी की और अचानक कमरे में छापेमारी कर दी। छापेमारी के समय सभी आरोपी अपने-अपने फोन पर लोगों को ठगने की कोशिश में व्यस्त थे और उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। मौके से पुलिस ने कई महंगे स्मार्टफोन, विभिन्न कंपनियों के दर्जनों फर्जी सिम कार्ड, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल इस साइबर अपराध में किया जा रहा था। इसके अलावा आरोपियों के पास से कई फर्जी बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और डायरियां भी मिली हैं, जिनमें शिकार बनाए गए लोगों और ट्रांजेक्शन का हिसाब-किताब दर्ज था।
ठगी का तरीका और पुलिस की आगे की कार्रवाई
आरोपियों की मोडस ऑपरेंडी (ठगी का तरीका) बेहद शातिराना थी; वे सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते थे और कहते थे कि आवास योजना या कृषि बीमा की राशि उनके बैंक खाते में ट्रांसफर होने वाली है। इसके बाद वे प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन चार्ज या टैक्स के नाम पर लोगों से छोटे-छोटे यूपीआई (UPI) भुगतान करवाते थे या फिर स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करवाकर उनका पूरा बैंक अकाउंट खाली कर देते थे। फिलहाल पुलिस ने सभी 11 आरोपियों के खिलाफ साइबर अपराध और जालसाजी की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अदालत में पेश कर पुलिस इन्हें रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि इनके अन्य साथियों और बैंक खातों के बारे में पता लगाया जा सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन्होंने अब तक कुल कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और उनसे कितनी रकम ऐंठी है।