कोलकाता: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा फेसबुक लाइव के दौरान बीजेपी सरकार के डर से किताबों की रॉयल्टी न मिलने के लगाए गए आरोपों पर नया विवाद खड़ा हो गया है। संबंधित प्रकाशक संस्था के प्रमुख ने पूर्व मुख्यमंत्री के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, भाजपा और अन्य विपक्षी नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों को लेकर उन पर जमकर निशाना साधा है।
फेसबुक लाइव में ममता बनर्जी ने क्या लगाए थे आरोप?
मंगलवार को अपने कालीघाट स्थित आवास से फेसबुक लाइव करते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि उनका खर्च उनकी किताबों से मिलने वाली रॉयल्टी से चलता है, लेकिन इस साल उन्हें रॉयल्टी की राशि नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के डर से लोग मुंह बंद किए हुए हैं। ममता बनर्जी पहले भी कई बार दावा कर चुकी हैं कि वे पूर्व सांसद की पेंशन और मुख्यमंत्री के रूप में वेतन नहीं लेती थीं और उनका गुजारा उनकी लिखी पुस्तकों की रॉयल्टी से ही होता है।
प्रकाशक ने खारिज किया दावा, कहा- रॉयल्टी जारी रहेगी
ममता बनर्जी की अधिकांश पुस्तकें प्रकाशित करने वाली संस्था के प्रमुख शुभंकर दे ने इन आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि वे 1995 से ममता बनर्जी की किताबें प्रकाशित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "जब वे मुख्यमंत्री थीं तब भी उन्हें रॉयल्टी मिलती थी, जब वे मुख्यमंत्री नहीं थीं तब भी मिलती थी और अब मुख्यमंत्री न रहने पर भी उन्हें रॉयल्टी मिलती रहेगी।"
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का तंज: 'घर बैठकर फेसबुक लाइव करने से क्या होगा?'
नबन्ना में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नाम लिए बिना पूर्व मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई की जनसभा में जो लोग बिड़ला तारामंडल के सामने नाच रहे थे, वे अब जमीनी स्तर पर (फलटा जैसी जगहों पर) नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि घर में बैठकर फेसबुक लाइव करने से काम नहीं चलता, उन्हें बाहर निकलना चाहिए। वहीं प्रदेश बीजेपी ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे का वीडियो पोस्ट कर लिखा कि "कल्पना में 10 में से 10, लेकिन फैक्ट-चेक में 10 में से 0।"
विरोधी नेताओं ने भी साधा निशाना
विधानसभा में विरोधी दल के नेता ऋतव्रत बनर्जी ने कहा कि जब कोई लगातार असत्य बातें कहता है तो उसे याद नहीं रहता कि उसने कब क्या बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए सरकारी पुस्तकालयों को जबरन उनकी किताबें खरीदने के लिए कहा जाता था। वहीं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पहले सत्ता के दम पर लोगों को जबरन उनकी रचनाएं पढ़ने के लिए दी जाती थीं, लेकिन अब सत्ता जाने के बाद आम लोग उनकी कविताएं और साहित्य नहीं पढ़ रहे हैं।