श्रीरामपुर:पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी पहली बार कोलकाता से बाहर किसी जिले में बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के जरिए सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। पार्टी की ओर से 11 सितंबर को हुगली के श्रीरामपुर में पदयात्रा का कार्यक्रम प्रस्तावित है। यह मार्च महेश के ऐतिहासिक रथबाड़ी इलाके से शुरू होकर श्रीरामपुर कोर्ट तक जाने की योजना है। हालांकि, कार्यक्रम को लेकर पुलिस की अनुमति अब विवाद का विषय बन गई है। TMC का दावा है कि 1 सितंबर को चंदननगर पुलिस कमिश्नरेट को आवेदन देने के बावजूद अब तक अनुमति नहीं मिली है। इसके बाद पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। अब पदयात्रा होगी या नहीं, इस पर अदालत के आदेश का इंतजार है।
महेश रथबाड़ी से श्रीरामपुर कोर्ट तक पदयात्रा की तैयारी
प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक ममता बनर्जी महेश के रथबाड़ी से पदयात्रा शुरू करेंगी। इसके बाद मार्च GT Road से होते हुए श्रीरामपुर अनुमंडल अदालत तक पहुंचने की योजना है। TMC की ओर से इसे कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के तौर पर तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम में श्रीरामपुर के सांसद कल्याण बनर्जी समेत हुगली जिले के कई वरिष्ठ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही गई है। चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में बदले समीकरणों के बीच ममता बनर्जी का किसी जिले में इस तरह सड़क पर उतरना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
पुलिस अनुमति को लेकर हाईकोर्ट पहुंची तृणमूल
TMC का आरोप है कि पार्टी ने 1 सितंबर को चंदननगर पुलिस कमिश्नरेट के पास पदयात्रा की अनुमति के लिए आवेदन दिया था, लेकिन पुलिस की ओर से अभी तक न तो अनुमति दी गई और न ही आवेदन को औपचारिक रूप से खारिज किया गया। इसी को आधार बनाकर पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। TMC नेताओं का कहना है कि अनुमति के मामले में देरी से 11 सितंबर के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं। मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की गई है। अब अदालत के आदेश से यह स्पष्ट होगा कि कार्यक्रम को किस तरह आयोजित किया जा सकेगा।
असित मजूमदार ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
श्रीरामपुर संगठनात्मक जिला TMC अध्यक्ष और पूर्व विधायक असित मजूमदार ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आवेदन के बावजूद अनुमति को लेकर फैसला नहीं किया जा रहा है और जानबूझकर समय गंवाया जा रहा है। मजूमदार ने राज्य की BJP सरकार और पुलिस प्रशासन पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि 21 जुलाई के कार्यक्रम से पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया था और उन्हें आशंका है कि 11 सितंबर की पदयात्रा से पहले भी उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, ये आरोप TMC नेता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस या राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कोई अलग पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के विरोध को बनाएगी मुद्दा
TMC का कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद उसके पंचायत, नगरपालिका और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं। पार्टी इन्हीं मुद्दों को लेकर श्रीरामपुर की पदयात्रा के जरिए विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। पार्टी के लिए यह कार्यक्रम केवल विरोध प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि हुगली में संगठन को फिर से सक्रिय करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों और संगठन के भीतर सामने आई चुनौतियों के बीच ममता बनर्जी की मौजूदगी से कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश की जा सकती है।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रशासन की नजर
ममता बनर्जी के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन के सामने सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था बड़ी चुनौती होगी। महेश से श्रीरामपुर तक प्रस्तावित मार्ग पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने की स्थिति में ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था की तैयारी भी करनी होगी। फिलहाल, 11 सितंबर के कार्यक्रम को लेकर अंतिम तस्वीर कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही साफ होगी।