कोलकाता: पश्चिम बंगाल में फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के मामले ने राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। हुगली जिले के गुप्तीपाड़ा में पारंपरिक रथयात्रा उत्सव में शामिल होने पहुंचे नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था I-PAC पर गंभीर आरोप लगाए हैं।पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि अवैध घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता का प्रमाण देने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बांटे गए हैं। उन्होंने कहा:"SIR (विशेष गहन समीक्षा) प्रक्रिया के दौरान अवैध रूप से बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए गए। I-PAC के लड़कों को बैठाकर पूर्व मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के निर्देशों पर जिस तरह यह पूरा खेल रचा गया, उसने राज्य और देश की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।"
राज्यभर में पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी
घोटाला सामने आते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। गुरुवार सुबह से ही कोलकाता, दुर्गापुर, नादिया, बीरभूम (सिउड़ी, रामपुरहाट, दुबराजपुर) और कूचबिहार सहित राज्य के कई पंचायतों और नगरपालिकाओं में पुलिस टीमों ने छापेमारी की। इस दौरान संदिग्ध रजिस्टरों और दस्तावेजों को खंगालने के साथ-साथ उन्हें जब्त किया गया।सुवेंदु अधिकारी ने पुलिसिया कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जितना भी रिकॉर्ड जब्त हुआ है, उसे पूरी तरह से स्कैन और सील किया जाएगा ताकि अब उसमें कोई हेरफेर या छेड़छाड़ न हो सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा:
- कार्रवाई का भरोसा: "यह एक बहुत बड़ा भ्रष्टाचार है। CAA के तहत स्वीकृत शरणार्थियों को कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन घुसपैठियों को बख्शा नहीं जाएगा।"
- दोषियों को जेल: "जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने ये फर्जी प्रमाणपत्र दिए हैं, उनके खिलाफ विभागीय जांच होगी। उन्हें सस्पेंड किया जाएगा और वे जेल जाएंगे। उन्हें यह भी बताना होगा कि उन्होंने किसके इशारे पर यह काम किया।"
नबन्ना से बड़ा फैसला: अब पंचायत प्रधान नहीं दे सकेंगे प्रमाणपत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में एक आपातकालीन संवाददाता सम्मेलन की। उन्होंने घोषणा की कि व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए अब से पंचायत प्रमुख या नगरपालिका अध्यक्ष सीधे जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं कर सकेंगे।अब यह जिम्मेदारी सीधे सरकारी अधिकारियों को सौंपी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जल्द ही पूरे राज्य में इस काम के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की जाएगी।