नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए 20 बागी सांसदों की लोकसभा सदस्यता को लेकर कानूनी और राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। मंगलवार (25 अगस्त 2026) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा TMC की अयोग्यता याचिका पर नोटिस जारी किए जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यालय ने कार्रवाई शुरू कर दी है। स्पीकर कार्यालय ने सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय समेत सभी 20 बागी सांसदों को अलग-अलग नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर अपना रुख स्पष्ट करने और लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
तृणमूल का दामन छोड़ NCPI में शामिल हुए थे 20 सांसद
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद तृणमूल कांग्रेस के अधिकांश सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से दूरी बना ली थी। इन 20 सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का गठन/विलय कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया था। हालांकि, संसद के मानसून सत्र के दौरान इन सांसदों के बैठने की व्यवस्था अलग सीटों पर की गई, लेकिन लोकसभा में NCPI के स्वतंत्र संसदीय दल के रूप में इन्हें अब तक आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अभिषेक बनर्जी, दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मांग की कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत इन 20 सांसदों की सदस्यता तुरंत प्रभाव से समाप्त की जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बागी सांसदों का यह कदम स्वेच्छा से TMC की सदस्यता छोड़ने के समान है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और सॉलिसिटर जनरल की दलील
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने दलीलें पेश कीं। वहीं, केंद्र और लोकसभा अध्यक्ष का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि स्पीकर कार्यालय ने TMC की अर्जी पर संज्ञान लेते हुए दलबदल विरोधी कानून के तहत प्रक्रिया शुरू कर दी है और सभी 20 सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। शीर्ष अदालत इस मामले में अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद करेगी।