कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य से बाहर काम की तलाश में जाने वाले परियायी (प्रवासी) श्रमिकों के परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (P&RD) ने राज्य के सभी जिलों के प्रशासन को चिन्हित प्रवासी श्रमिक परिवारों की पहचान और उन्हें ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड (GRGC) उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सरकार का लक्ष्य चिन्हित 22,24,060 प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को 100 प्रतिशत कार्ड कवरेज देना है, ताकि पात्र वयस्क सदस्यों को अपने गांव में ही मजदूरी आधारित रोजगार मिल सके और मजबूरी में दूसरे राज्यों में पलायन करने की जरूरत कम हो।
सिर्फ कार्ड नहीं, काम की मांग पर रोजगार देने पर जोर
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जिलों को निर्देश दिया है कि प्रवासी श्रमिकों से जुड़े आंकड़ों का सत्यापन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि जिन पात्र परिवारों के पास रोजगार कार्ड नहीं है, उन्हें जल्द से जल्द कार्ड जारी किया जाए। सरकार का जोर केवल कार्ड वितरण तक सीमित नहीं है। अभियान के तहत पात्र परिवारों के वयस्क सदस्य जब रोजगार की मांग करेंगे, तो उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में गारंटीकृत मजदूरी आधारित काम उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाकर बाहरी राज्यों की ओर होने वाले पलायन को कम करना है।
मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा प्रवासी श्रमिक परिवार
राज्य के 22 जिलों में कुल 22,24,060 प्रवासी श्रमिकों की पहचान की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद इस सूची में सबसे ऊपर है। मुर्शिदाबाद में 3,86,191, जबकि मालदा में 2,86,329 प्रवासी श्रमिकों की पहचान की गई है। इसके बाद पश्चिम मेदिनीपुर में 1,68,570, नदिया में 1,61,908, पूर्व मेदिनीपुर में 1,57,376 और दक्षिण 24 परगना में 1,50,987 श्रमिक चिन्हित किए गए हैं। उत्तर 24 परगना में यह संख्या 1,27,936 और पूर्व बर्धमान में 1,12,452 बताई गई है। वहीं, कालिम्पोंग में सबसे कम 3,435 प्रवासी श्रमिकों की पहचान हुई है।
किन जिलों में कितने प्रवासी श्रमिक चिन्हित?
- मुर्शिदाबाद: 3,86,191
- मालदा: 2,86,329
- पश्चिम मेदिनीपुर: 1,68,570
- नदिया: 1,61,908
- पूर्व मेदिनीपुर: 1,57,376
- दक्षिण 24 परगना: 1,50,987
- कोचबिहार: 1,44,916
- उत्तर 24 परगना: 1,27,936
- पूर्व बर्धमान: 1,12,452
- बीरभूम: 95,946
- कालिम्पोंग: 3,435
‘कर्म साथी’ और ‘स्वास्थ्य साथी’ से भी जोड़ने की तैयारी
प्रवासी श्रमिकों के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे कल्याणकारी कार्यक्रमों का दायरा रोजगार के साथ सामाजिक सुरक्षा तक बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। पश्चिम बंगाल परियायी श्रमिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से इन परिवारों को ‘कर्म साथी’ जैसे रोजगार संबंधी प्लेटफॉर्म और ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना से जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई श्रमिक रोजगार के लिए दूसरे राज्य में जाता भी है, तो उसे स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच मिल सके।
पलायन रोकने पर सरकार का फोकस
बंगाल के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रमिक रोजगार की तलाश में देश के दूसरे हिस्सों में जाते हैं। सरकार का यह अभियान ऐसे परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार का विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चिन्हित परिवारों में कितने लोगों को वास्तव में रोजगार कार्ड मिलते हैं और रोजगार की मांग करने पर उन्हें समय पर काम उपलब्ध कराया जाता है।