कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान से पहले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) ने राज्य में सुरक्षा का ऐसा घेरा तैयार किया है, जिसे भेदना उपद्रवियों के लिए नामुमकिन होगा। चुनाव को हिंसा मुक्त और निष्पक्ष बनाने के लिए केंद्रीय बलों ने ‘ऑल आउट’ (All Out), ‘नाइट डोमिनेंस’ (Night Dominance), कवच’ (Kavach) और ‘ट्रस्ट’ (Trust) जैसे विशेष अभियान शुरू किए हैं।
2.4 लाख जवानों का पहरा और एंटी-रॉयट गाड़ियाँ
एक आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 29 अप्रैल को होने वाले अंतिम चरण के मतदान के लिए राज्य भर में लगभग 2.4 लाख CAPF जवानों को तैनात किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में मतदाताओं का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए 100 से अधिक बख्तरबंद और दंगा विरोधी (Anti-Riot) वाहनों को मैदान में उतारा गया है। ये बल 24 घंटे गश्त, एरिया डोमिनेशन और फ्लैग मार्च कर रहे हैं।
मणिपुर और कश्मीर से बुलाए गए जवान
सुरक्षा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हिंसा प्रभावित मणिपुर से CAPF की 85 कंपनियों (करीब 8,500 जवान) को हटाकर बंगाल चुनाव में लगाया गया है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित इलाकों से भी जवानों को यहां तैनात किया गया है। CRPF के एक अधिकारी ने बताया, "हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता बिना किसी डर के वोट डाल सकें। कई लोगों ने हमें बताया कि वे 20-30 साल बाद पहली बार वोट दे पा रहे हैं।"
पहली बार एक साथ जुटे सभी CAPF के महानिदेशक
चुनाव के इतिहास में पहली बार, 18 अप्रैल को कोलकाता में सभी केंद्रीय बलों (CRPF, BSF, CISF, SSB और ITBP) के महानिदेशकों (DGs) की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें एक 'टेक्नोलॉजी-ड्रिवन' सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया, जिसमें क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और एंटी-सबोटैज चेक को शामिल किया गया है। सोशल मीडिया पर भी CRPF सक्रिय रूप से इन ऑपरेशंस की जानकारी साझा कर रही है ताकि जनता में सुरक्षा का भाव पैदा हो सके।