कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 ने मतदान के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे आज़ादी के बाद का “सबसे बड़ा जनभागीदारी वाला चुनाव” बताते हुए राज्य के मतदाताओं की सराहना की है।
रिकॉर्ड मतदान के साथ चुनाव संपन्न
दो चरणों में हुए इस चुनाव का समापन बुधवार को हुआ, जहां मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पहले चरण में 93% से अधिक और दूसरे चरण में 92% से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया। कुल मिलाकर औसत मतदान लगभग 92.5% के आसपास रहा, जो राज्य के चुनावी इतिहास में अभूतपूर्व है।
पिछले सभी आंकड़े पीछे छूटे
भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार, इससे पहले 2011 का चुनाव सबसे अधिक मतदान वाला माना जाता था, लेकिन इस बार के आंकड़ों ने उस रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया। 2016, 2021 और 1996 के चुनावों की तुलना में भी इस बार वोटिंग प्रतिशत कहीं ज्यादा रहा।
जिलों में भी दिखा जबरदस्त उत्साह
दूसरे चरण में 140 से ज्यादा सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें कई जिलों ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरबा बर्धमान सबसे आगे रहा, जबकि हुगली, नदिया और उत्तर व दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में भी भारी मतदान देखने को मिला। कोलकाता के शहरी इलाकों में भी उम्मीद से ज्यादा वोटिंग हुई, जो आमतौर पर कम रहती है।
तनाव के बीच शांतिपूर्ण मतदान
हालांकि चुनाव के दौरान माहौल पूरी तरह शांत नहीं रहा, लेकिन बड़े स्तर पर हिंसा की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई। प्रशासन के अनुसार, कुल मिलाकर मतदान प्रक्रिया नियंत्रित और अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई।
ममता बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने भवानीपुर में मतदान केंद्रों का दौरा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डाली जा रही है और बाहरी हस्तक्षेप बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि बिना वारंट के कार्रवाई हो रही है और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे निष्पक्ष चुनाव पर सवाल उठते हैं।
सुवेंदु अधिकारी ने दिया अलग बयान
वहीं बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कई मतदान केंद्रों का दौरा कर माहौल को शांतिपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस बार खासतौर पर कोलकाता में मतदाताओं की भागीदारी ने सभी को चौंकाया है।हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर सत्ताधारी दल की ओर से गड़बड़ी की कोशिशें हुईं, जिन्हें समय रहते रोका गया।
कुछ जगहों पर झड़प और शिकायतें
चुनाव के दौरान अलग-अलग इलाकों से छिटपुट विवादों की खबरें भी सामने आईं। कहीं EVM से छेड़छाड़ के आरोप लगे तो कहीं उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं पर हमले की शिकायतें आईं। कुछ क्षेत्रों में केंद्रीय बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा।